74 वर्षीय 'रामविलास पासवान' पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे, 22 अगस्त को 'फोर्टिस अस्पताल' में भर्ती हुए, 3. अक्टूबर को दिल का ऑपरेशन किया गया, उनकी स्थिति सुधरने लगी थी, जिसके बाद उनकी एक और सर्जरी अभी बाकी थी। लेकिन 8,अक्टूबर, गुरुवार की शाम उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचाया जा सका।
राम विलास पासवान जी का जन्म आजादी के एक साल पहले 5, जुलाई 1946 में 'खगड़िया' के एक छोटे से गांव 'शहरबन्नी' मैं हुआ। 1983 में पासवान जी ने दलितों के उत्थान के लिए दलित सेना का संगठन खड़ा किया, जिस वजह से वह राष्ट्रीय राजनीति पर छा जाने वाले दलित राजनीति के सबसे लोकप्रिय चेहरा बन गए।'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' में अपना नाम दर्ज करा चुके, रामविलास पासवान के नाम छे प्रधानमंत्रियों के मंत्री मंडल में काम करने का रिकॉर्ड भी दर्ज हैं।
1989 रामविलास जी पहली बार हाजीपुर से JD(NF) से जीते और प्रधानमंत्री 'विश्वनाथ प्रताप सिंह' की कैबिनेट में केंद्रीय 'श्रम' और 'कल्याण' मंत्री बने। फिर
(2). JD(U) से पीएम इंद्र कुमार गुजराल,(3). JD(U) से पीएम एचडी देवगौड़ा, (4). NDA से पीएम अटल बिहारी वाजपेई (5). UPA से पीएम डॉ.मनमोहन सिंह और फिर (6). NDA से पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में केंद्रीय 'उपभोक्ता मामले','खाद्य' और 'सार्वजनिक वितरण प्रणाली' मंत्री रहे।
आपको बता दें बिहार चुनाव में इस बार चिराग पासवान की पार्टी 'लोक जनशक्ति पार्टी' (LJP) का गठबंधन BJP से है, हालांकि BJP का गठबंधन JDU से भी है। मगर चिराग अपने सारे उम्मीदवार JDU के विपक्ष में उतारेंगे।
अब ऐसे में दो बड़े सवाल उठते है, 'पहला' -क्या बिहार की जनता चिराग के पिता 'रामविलास पासवान' के देहांत की सहानुभूति चिराग को 'वोट' डाल कर देगी।
'दूसरा' -पिता के देहांत के बाद, क्या चिराग उनके भाग्य की गरिमा को कायम रख पाएंगे, क्या उसे ओर आगे तक बढ़ाएंगे या फिर फेल हो जाएंगे।
फिलहाल तो इन सवालों के जवाब परिणामों की घोषणा के बाद ही पता चल पाएंगे। तब तक के लिए 'चिराग पासवान' और उनके परिवार को हमारा ढेर सारा प्यार।
नमस्कार, राहुल सिंह द्वारा