Thursday, 8 October 2020

सुशांत की गाड़ी, आत्महत्या से चली और आत्महत्या पर ही आ रुकी, नहीं मिली इंसाफ की मंजिल

 14 जून 2020 भारत में सनसनी की तरह एक खबर फैली, 'बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत ने अपने घर में पंखे से लटक कर की आत्महत्या' बस इतनी सी थी यह खबर, उसके बाद अगले दो-तीन दिन तक मीडिया में यह खबर टॉप बैंड पर बनी रही और उसके बाद ये चैप्टर बंद हो गया।

मगर तारीख 25, जुलाई 2020 को ये चैप्टर फिर खुला जब सुशांत के पिता के.के सिंह ने पटना के राजीव नगर थाने में 'रिहा चक्रवर्ती' के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
बस फिर तो मीडिया ने सर पे कफन बांधा और 'Justice for SSR' का नेमप्लेट लगाकर सुशांत नाम की गाड़ी चलाना शुरु कर दी और इंसाफ की मंजिल तक पहुंचने का तय कर लिया, चाहे फिर रास्ते में जो आए। आइए आपको बताते हैं यह सफर कैसा रहा-
रंग बिरंगे हेडलाइंस चले 'रिहा का काला जादू', 'दगाबाज रिहा', 'झूठी रिहा', 'नशेड़ी रिहा', 'ड्रगी रिहा और ना जाने क्या क्या। सबसे पहले रास्ते में चेकिंग लगी ED की, जहां सुशांत नामक गाड़ी की जांच हुई, थोड़ा बहुत मामला गड़बड़ निकला मगर गाड़ी को आगे जाने दिया, फिर CBI की चेकिंग लगी, लंबी जांच पड़ताल चलने लगी, रिहा के साथ-साथ बहुत से लोग जेल भी गए। 'कंगना राणावत' तो इस गाड़ी की बहुत पहले से 'को-कंडक्टर' बनी हुई थी, रास्तों में उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी, ईतनी सुर्खियां बटोरी कि अपना ऑफिस ही तुड़वा बेठी, कुछ दिनों के लिए नेमप्लेट बदला 'Justice for SSR' से नेमप्लेट Justice for kangna' हो गया। फिर गाड़ी की रफ्तार रास्ता भटकने के कारण धीमी पड़ने लगी, तो नेताओं ने कहा, 'इंसाफ की मंजिल मिले ना मिले गाड़ी को बिहार घुमा लो' अब ये तो आप सब को पता ही है, बिहार में क्या है इस वक्त। इसी दौरान बीच रास्ते में 'बेरोजगारी' आई मीडिया वालों ने सुशांत की गाड़ी से उसे कुचल दिया, 'भीषण आर्थिक मंदी' आई उसे भी कुचल दिया, 'कोरोना का बढ़ता दर' और 'लोगों की मौत' इसे भी कुचल दिया, 'युवाओं का रोजगार को लेकर तगड़ा विरोध प्रदर्शन' इसे भी कुचल दिया, कोई नहीं चला। अब अंत में भटकते-भटकते सुशांत की गाड़ी जा पहुंची 'ड्रगीवुड' जहां लगी थी NCB कि चेकिंग। इस चेकिंग में किन-किन के नाम सामने आए वह तो आप भली-भांति जानते ही होंगे, मगर अफसोस की बात यह रही कि आखिरकार मीडिया सुशांत की गाड़ी को इंसाफ की मंजिल तक नहीं ही पहुंचा पाई। खूब मेहनत की, खूब पसीना बहाया, खूब चिल्लाया, सब बर्बाद गया, मगर एक फायदा जरूर हुआ, झोली में TRP खूब भर-भर कर आई। ऐसे में एक कहावत याद आ रही हैं, -'अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता'।
फिलहाल आज 6,अक्टूबर 2020 एक बार फिर यही खबर है 'बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत ने अपने घर में पंखे से लटक कर की आत्महत्या' मगर पहली वाली खबर लोगों को हजम नहीं हो रही थी और चूंकि अब AIIMS ने अपनी रिपोर्ट में पुष्टि कर दीया है, की सुशांत सिंह राजपूत की मौत आत्महत्या ही है, तो अब धीरे-धीरे लोग मान रहे हैं। अंत में मुझे दुख है की, कई मीडिया चैनल्स की दो महीने तक चली 'सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ' दिलाने की मुहिम फेल हो गई, मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

शुक्रिया, राहुल सिंह द्वारा

No comments:

Post a Comment