Wednesday, 7 October 2020

'कोमल पुष्प-अम' बिहार की एक नई उम्मीद

बिहार में एक वह दौर था जब, 1997 में पहली बार महिला मुख्यमंत्री 'राबड़ी देवी' बनी, यह तब हुआ जब उनके पति लालू यादव को 'चारा घोटाला' के आरोप में गिरफ्तारी वारंट जारी कर मुख्यमंत्री के पद से हटाया दीया गया। इससे आप अंदाजा लगा ही चुके होंगे हैं, कि उस दौर में जब 'मुख्यमंत्री' ही भ्रष्टाचारी थे, तो पूरी राज्य सरकार कैसी रही होगी।

खैर छोड़िए, आज देश बदल चुका है, मोदी जी के संदर्भ में कहूं तो 'भारत' अब 'नया भारत' बन चुका है। वह 1997 था जब उन्हें मजबूरी में बिहार की सत्ता को संभालना पड़ा और अब 2020 है और बिहार चुनाव में एक बार फिर महिला प्रत्याशी के रूप में बिहार के दरभंगा जिले की बेटी 'पुष्पम प्रिया चौधरी' मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी 8, मार्च 2020 को घोषित कर चुकी है। एक मिनट अगर आप इसकी तुलना राबड़ी देवी से कर रहे हैं, तो यह बिल्कुल गलत होगा।
लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज, यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स, यूके और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से डेवलपमेंट स्टडीज में एमए के साथ सशस्त्र कर चुकी पुष्पम प्रिया चौधरी ने अपनी पार्टी 'प्लूरल्स' बनाकर बिहार चुनाव के रेस में अकेले दौड़ने वाली हैं। हालही में उन्होंने अपने 40 उम्मीदवारों की पहली सूची भी जारी कर दी है और आगे 32 अन्य उम्मीदवारों की लिस्ट जल्द ही जारी कर दी जाएगी। हालांकि वह खुद 2 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी पहला मधुबनी जिले के 'बिस्फी' से और दूसरा 'मगध' क्षेत्र से। गौर करने वाली बात यह है की उम्मीदवारों के 'जाति' वाले 'सेक्शन' में 'प्लूरल्स पार्टी' ने उनके प्रोफेशन का जिक्र किया है। पार्टी के उम्मीदवारों में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, टीचर, सोशल एक्टिविस्ट, वकील, बिजनेसमैन, किसान और गृहिणी शामिल है। ऐसे में अगर बिहार में 'प्लूरल्स पार्टी' की सरकार बनती है, तो यह 'जातिवाद' को कम करने और साक्षरता को बढ़ाने की एक अच्छी पहल साबित हो सकती है। क्योंकि बिहार में 'जातिवाद' चरम पर है, करीब 80% लोग बिहार में मतदान आज भी प्रत्याशी के 'जाति' के आधार पर ही करते हैं। पार्टी के कई तरह के दमदार 'टैगलाइन' है, जैसे कि "Love Bihar, Hate Politics" और “आप सीढ़ी पर चढ़ने पर ध्यान केंद्रित करें और हम सांपों से निपटते हैं”। इस तरह के हटके 'टैगलाइंस' को देखकर एक नई सोच और नई उम्मीद की किरण नजर आती है बिहार में।
फिलहाल इनके पिता की बात करें तो 'विनोद चौधरी' JDU के अतितकालीन MLC रह चुके हैं और दरभंगा के लेहरियासराय मैं दो दशकों से पत्रकार भी रह चुके हैं। बेटी के विधानसभा चुनाव लड़ने पर चौधरी जी का कहना है, कि वह वयस्क और शिक्षित हैं यह उनका फैसला है। मगर BJP-JDU, RJD-Cong, LJP-BJP जैसे महागठबंधन वाले कांटों में क्या अकेली 'प्लूरल्स पार्टी' की 'कोमल पुष्प-अम' खिल पाएंगी, यह तो परिणामों के घोषणा के बाद ही पता चल पाएगा। 
अंत में जाते-जाते आपको एक बात बताते जाते हैं, सुनने में आया है की अगर 'पुष्पम प्रिया चौधरी' जीतती है तो बिहार को 2030 तक यूरोप में तब्दील कर देंगी यह उनका वादा है। अब  आप इसे मजाक भी समझ सकते हैं और नहीं भी, तय आपको करना है।

नमस्कार, राहुल सिंह द्वारा

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