Brief And Origin of 'n-COVID -19'
साल 2002 में 'बिल्ली'(Cat) से इंसानी शरीर मैं एक वायरस आया, जिसे 'SAARS' नाम से जाना गया, फिर इसी के जैसा 'MERS' वायरस आया जो इंसानी शरीर में 'ऊंट'(Camel) के जरिए आया।
दिसंबर 2019 चीन के वुहान जिले में अचानक से 'निमोनिया' के मरीज बढ़ने लगे, जब उन मरीजों पे किसी भी दवाई का असर नहीं हुआ, तब चीनी वैज्ञानिकों ने खोज करना शुरू किया, जिसमें चाइना के 'सीफूड सिटी''Quanan Seafood Holesale Market' का नाम सामने आया, जहां सांप, केकड़ा, मछली, चमगादड़ व अन्य जीव खाए जाते हैं। इसके बाद जब सभी मरीजों का जांच(Test) किया गया, तब एक नए प्रकार का वायरस सामने निकल कर आया जो लगभग 'SAARS' वायरस के जैसा ही था, जिसे "नोवल कोरोना वायरस" या n- COVID -19 के नाम से जाना गया।
बात करें कोरोना वायरस के मृत्यु दर की तो यह मात्र 3% है। कोरोना वायरस से उस ही व्यक्ति की मौत होती है, जिसका 'इम्यून सिस्टम' कमजोर होता हैं, जैसे बुजुर्ग और बच्चे। अधिकतर मौतों की वजह या तो बेहद खतरनाक निमोनिया हो जाना या फिर इसके कारण आपकी किडनी का फेल हो जाना है। कोरोना वायरस अधिकतर हवा में बूंदों के कारण फैलता है, यानी कि जब कोरोना ग्रसित कोई छीकता या खास्ता है, तो मुंह से निकली बूंदे सामने वाले को कोरोना संक्रमित कर सकती है। माना जाता है की कोरोना वायरस अपने लक्षण 2 से 14 दिनों में दिखाता है। मगर कई बार जांच के बाद भी इसके लक्षण को पकड़ पाना मुश्किल होता है। कुछ ऐसा ही दिल्ली में एक मरीज के साथ हुआ
Patient name : Jit Singh (ASI in Delhi Police, 'Haujkhash')
Age: '57' year'
Place where he infected And Initial Symptoms
दिनांक: 30-मार्च को 'जीत सिंह' की ड्यूटी दिल्ली के 'युसूफ सराय' इलाके में थी। ड्यूटी से वापस घर लौटने के दौरान जीत सिंह के शरीर में दर्द शुरू हो गया, वह बताते हैं रात तक दर्द इतना बढ़ गया कि उन्हें दर्द की दवाई खानी पड़ी, रात भर के लिए तो उन्हें उस दर्द से आराम मिल गया, मगर अगले दिन 31-मार्च को वह दोबारा ड्यूटी पर गए और फिर से उनके शरीर में तेज दर्द होने लगा, उन्होंने अपने TI अफसर को बताया, कि मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होते जा रही है। अफसर ने उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी। दिनांक 1-अप्रैल को वह 'ऐम्स अस्पताल' गए, जहां डॉक्टरों ने मेंरा बीपी और तापमान चेक किया, उसके बाद उन्होंने मेरा कोरोना का भी जांच किया और कहा आप में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, आप 14 दिन के लिए 'Home quarantine' रहिये।
HOME QUARANTINE (Phase-1)
दिनांक 1-अप्रैल को अस्पताल से घर आने के बाद जीत सिंह अपने आप को सबसे अलग करके 14 दिन के लिए 'Home quarantine' किया। जीत बताते हैं, क्वारंटाइन होने के बाद भी मेरा तापमान और बुखार वैसा का वैसा ही रहा, हर बार 103-104 बुखार रहता था। उनके परिवार वालों ने 'Home Quarantine' के दोरान उनकी अच्छे से खातेदारी की, उनको हर वक्त पपीता और अन्य फल खिलाया। परिवार को हमेशा से डर बना रहता था, कि कहीं जीत को कोरोना वायरस ना हो जाए।
After Home Quarantine
'होम क्वॉरेंटाइन' से कोई आराम ना मिलने के बाद, जित उसके बाद 'बंसल' अस्पताल मे गए। उसमें उन्होंने अपना TFT, PFT, मलेरिया, टाइफाइड आदि, सब चेक करवाया। उसके बाद उन्हें एक डॉक्टर ने सलाह दी 'कि आप अपना कोरोना टेस्ट भी करा लीजिए' जीत ने कोरोना का जांच फिर से करवाया, मगर वह भी फिर नेगेटिव आई। इसके बाद वह इतना परेशान हो गए की वह ड्यूटी पर भी नहीं जाते थे, और घर पर आराम करते थे मगर दिनांक 21-अप्रैल को जीत ने एक बार फिर हिम्मत की और अपने क्षेत्र में गए, वहां उन्होंने अपने सीनियर अफसरों को एक बार फिर बताया कि मेरी तबीयत ज्यादा खराब हो रही है, सांस लेने में समस्या होने लगी है और बुखार पिछले एक हफ्ते से 103-104 बना रह रहा है। उसके बाद जीत के अफसर उसे सफदरगंज ले गए फिर 'एम्स' ले गए वहां उन्होंने अपना कोरोना का तीसरी बार चेकअप कराया। दिनांक 22-अप्रैल हौज खास के 'डैग लैब' से ठीक शाम के 6:30 मिनट पर मेरी रिपोर्ट आ गई जिसमें मेरा 'n- COVID-19' पॉजिटिव आया। जीत का कुल तीन बार कोरोना का जांच हुआ जिस में से वह तीसरी बार में पाजिटिव पाए गए।
His Reaction After 'COVID-19' Positive
जीत बताते हैं जब उन्हें मालूम चला कि वह 'कोविड-19' पॉजिटिव हैं तब उन्हें यकीन नहीं हुआ। उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी अपने अंदर कोरोना वायरस के लक्ष्ण को पहचानने में आई दिक्कतों के कारण हुई, क्योंकि पिछली दो बार जब उन्होंने अपना कोरोना वायरस का जांच करवाया था, तो वह दोनों बार नेगेटिव पाए गए थे, मगर तीसरी बार पॉजिटिव हो गए। उसके बाद धैर्य से काम लेते हुए वह अपने घर गए और अपने बच्चों से कहा तुम लोग यहीं रहो, मैं कुछ दिनों के लिए अस्पताल जा रहा हूं, वह अपने बड़े बेटे को लेकर अस्पताल गए, और वहां उन्हें अपने सीनियर अफसर मिले। अस्पताल के स्टाफ मौके पर सारे वही मिले, जिन्होंने मुझे भर्ती कराया अस्पताल में। जीत बताते हैं, कि जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह खुश हुए क्योंकि उन्हें मालूम था, कि अब मैं ठीक हो जाऊंगा।
HOSPITAL QUARANTINE (Phase -2)
सफदरगंज हॉस्पिटल मैं उन्हें दिनांक 22-अप्रैल, श्याम 8:00 बजे क्वारंटाइन कर दिया गया। उन्हें शुरुआती में अलग से कपड़े दिए गए, मुंह पर लगाने के लिए मास्क दिया गया और हाथों को हमेशा साफ रखने के लिए 'सैनिटाइजर' भी दिया गया। इसके बाद उनका रोज इलाज चला जिसमें ऐसी कोई डरने वाली बात नहीं थी, उन्हें इलाज के दौरान कोई दर्द महसूस भी नहीं हुआ। हालांकि बीच-बीच मेंं उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, तब उन्हें ऑक्सीजन दिया गया, AC या पंखा चलाना सख्त मना था, जिसके कारण जीत सिंह बताते हैं उनकी 'टी-शर्ट' रात में पसीने से पूरी भीग जाती थी। हॉस्पिटल के कर्मचारी हर 10 मिनट बाद मरीजों के पास उनका हालचाल जानने के लिए आते थे, और खाना हर रोज तीन वक़्त का मिलता था। जिस कमरे में जीत भर्ती थे उसी कमरे में कोविड-19 का ही एक और मरीज भी भर्ती था, मगर दोनों की दूरी को बनाकर रखा गया था। वह दोनों सुबह और शाम 'प्राणायाम' भी किया करते थे, जिससे उन्हें काफी आराम महसूस होता था। जीत बताते हैं हॉस्पिटल में साफ सफाई को लेकर खास ध्यान रखा जाता था, हॉस्पिटल का हर एक कर्मचारी अपने आप को 'PPE' किट से ढक कर रखता था। हॉस्पिटल के सभी डॉक्टरों ने भी मुझे सलाह दी की 'घबराने की कोई बात नहीं है, आप एक सामान्य मरीज की तरह रहो, आप बहुत जल्द ठीक हो जाओगे'।
Expectations VS Reality
जीत बताते हैं, कि उनके दिमाग में कभी भी यह फील नहीं हुआ, कि मुझे कोरोना वायरस हो सकता है, उनके दिमाग में था कि वह एक सामान्य बीमारी से ग्रसित हुए हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी, उनके दिमाग में यह कभी भी रहा ही नहीं, कि उन्हें कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी कभी हो जाएगी। उन्हें लगा की मुझे कुछ दिन इलाज मिलेगा और मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा। उन्हें शुरुआती में लगा था, कि कोरोना वायरस के इलाज में शायद दर्द की मात्रा अधिक होगी, मगर हकीकत इसके कुल विप विपरीतरीत थी। वह जब बीमार थे, तो उन्हें लगता था कि उनके अफसर और दूसरे पुलिस वाले उनसे दूर भागेंगे मगर हकीकत में कुछ को छोड़कर उनके अफसरों ने जीत की बहुत मदद की। वह बताते हैं जांच में दो बार 'नेगेटिव' आने पर उन्हें पूरा यकीन हो गया था, कि मुझे 'कोविड-19' नहीं है, मगर जब तीसरी बार जांच कराया तो परिणाम हैरान कर देने वाला था
Message from 'Jit Singh' to other Corona Victims
जीत सिंह कुल 11 दिनों के अंदर यानी कि 3-मई को कोविड-19 को मात देकर अपने घर वापस लौटे। जहां उनका उनके परिवार वालों ने स्वागत किया। और दिनांक 6 मई से जीत सिंह दोबारा अपनी ड्यूटी पर गए। जीत सिंह कहते हैं, कोरोना वायरस से लड़ना है तो सबसे ज्यादा 'धैर्य' और 'संयम' बना कर रखना जरूरी है। इसके अलावा इसे दिमाग पर ना ले कि मुझे कोरोना, कोरोना है, हमें हो जाएगा,। डॉक्टर और प्रशासन द्वारा बताए गए सभी नियमों का पालन करें खुद से कोई भी काम ना करें, अपने परिवार से तभी मिले जब आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाए और जिस तरीके से मैं 4 से 5 दिन में रिकवर हुआ वैसे ही आप भी 4 से 5 दिनों में ही ठीक हो जाएंगे, बशर्ते घबराएं ना और संयम बना के रखें।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
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