भारतीय सरकार ने चाइना के कुल 59 एप्स पर बैन लगा कर डिजिटल वार की शुरुआत कर दी है, मगर क्या ये बैन हमेशा के लिए रहने वाला है या फिर जब तक भारत और चीन का सीमा विवाद चलेगा तब तक, कहीं यह बैन भारतीय लोगों के चीन के प्रति विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मजबूरी में तो नहीं किया गया। यह सब मैं आपको आगे बताऊंगा। मगर आइए पहले जरा मामले को समझते हैं।
-Negative impacts (Demerits of ban Chinese apps)
जरा गहराई से सोचिए क्या कोई केवल 15 सेकंड की वीडियो मैं अपना हुनर दिखा सकता है, क्या कोई 15 सेकंड की रोज वीडियो बनाकर प्रसिद्धि पा सकता है, जी हां, यह सब संभव हुआ केवल टिक-टॉक जैसे ऐप के वजह से। मगर टिक टॉक, यूसी ब्राउजर, यूसी न्यूज़ और शेयर इट जैसे बड़ी कंपनियों पर बैन लगने से ना सिर्फ कई लोगों के लिए हुनर का प्लेटफार्म छीना बल्कि इन कंपनियों को भारत में चलाने वाले कई लोग और पत्रकार जो यूसी न्यूज़ में अपना आर्टिकल देते थे उनके हाथों से रोजगार भी छीना, वह सब अब बेरोजगार हो गाए। कहीं ऐसा तो नहीं चीन के साथ सीमा विवाद के बदले की भावना में भारत खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है, क्योंकि भारत में लोकडाउन के बाद वैसे भी बेरोजगारी दर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार ने इन चाइनीस ऐप्स को बैन करके बेरोजगारी की दर को दुगना करने का काम किया हैं।
बात करें आंकड़ों की तो भारत में टिक-टॉक का हेड क्वार्टर 'मुंबई' में हैं, जहां लगभग दो हजार लोग इसमें काम करते थे। टिक-टॉक सबसे ज्यादा भारत में उपयोग किया जाता है, लगभग 30% यानी कि 12 करोड़ एक्टिव यूजर्स भारत में है, यूसी ब्राउजर के भी 12 करोड़ यूजर हैं, शेयर इट के 20 करोड़, क्लब फैक्ट्री और कैमस्कैनर के 10 करोड़ यूजर्स हैं। अब कई लोगों का कहना है, केवल चाइनीस एप्स को ही क्यों बैन किया गया और इससे क्या होगा। आइए बात करते हैं।
-Why only Chinese apps and its consequences
बात करें चाइनीस एप्स के केवल बैन होने की तो आपको बता दे, 'टिक-टॉक' US और ऑस्ट्रेलिया मिलिट्री में भी बैन है, इसकी बड़ी वजह ये है, की टिक-टॉक डेटा चोरी करके कहीं दूसरे सर्वर पर भेजता है जिसकी खोज 'European data protection authority' और USA भी करने में लगा हुआ है। टिक-टॉक अपनी 'Privacy policy' में खुद कहता है- 'we collect information about your location, including location information based on your SIM Card and IP address' लीजिए आपको बता दें 'गूगल मैप' और 'आरोग्य सेतु' जैसे जरूरी एप्स भी आपका लोकेशन और डाटा नहीं ले सकते बिना आपके इजाजत के। इसके अलावा दूसरा कारण 'Club factory' ऐप का है जो कि एक 'E-Commerce' कंपनी है, ये बिना 'कस्टम ड्यूटी' यानी कि 'टैक्स' दिए बिना अपने ऑर्डर की डिलीवरी उपभोक्ताओं तक करती है, इसको लेकर लोगों ने भी बहुत सवाल उठाए।
अब बात करें परिणाम की तो यह पहली बार नहीं है जब टिक-टॉक को भारत ने बैन किया, इससे पहले साल 2018 मैं भी टिक-टॉक को बैन किया गया, यह कहकर की 'टिक-टॉक "चाइल्ड पोर्नोग्राफी" जैसे कंटेंट दिखाता है' और तब "बाइटडांस" को रोज 500 लाख US डॉलर का घाटा सहना पड़ा था। अब आज भारत में टिक टॉक के फिर बैन होने से चीन को 10% का घाटा सहना पड रहा है 'uninstalling' की वजह से। परिणाम में चीन ने भी भारत के 'न्यूज वेबसाइट्स' और 'ई-अखबार' बैन कर दिए हैं, चीनी दूतावास ने यहां तक विरोध किया और नाराजगी भी जताई। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी 'ByteDanceltd' के टिक-टॉक समेत तीन एप्स पर बैन लगने से कंपनी को 6 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान भी है।
-Tik-Tok update statement VS Facts check
भारत में 'टिक-टॉक' के प्रमुख 'निखिल गांधी' ने टिक-टॉक बंद होने के बाद एक 'अपडेट' जारी किया जिसमें ये कहा गया:- 'हम भारत सरकार के अंतिम आदेश को मानने की प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैं, टिक टॉक डेटा की निजता और भारतीय क़ानून के हिसाब से सुरक्षा ज़रूरतों का पालन करता है। हम भारतीयों का डेटा किसी भी विदेशी सरकार के साथ, यहां तक चीनी सरकार के साथ भी साझा नहीं करते। हम उच्च श्रेणी का दर्जा देते हैं, अपने उपभोक्ताओं को 'गोपनीयता' और 'अखंडता' के प्रति।
टिक-टॉक ने 'इंटरनेट का 'लोकतांत्रिक करण' किया है, यह सौ-करोड़ उपभोक्ताओं के साथ, 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। जिसमें कलाकार, कहानी वाचक, शिक्षा और प्रस्तुतकर्ता, आधारित हैं अपना घर-बार चलाने के लिए।
-Facts check
'सलोनी गौर नजमा' जो टिक-टॉक पर कॉमेडी-वीडियो बनाया करती थी, जिसमें वो चाइनीस सरकार की आलोचना करती थी, मगर उसकी वीडियो हर बार हटा दी गई, क्या यह लोकतांत्रिक है ?, बिना पूछे आपका डेटा और लोकेशन की जानकारी लेना, क्या ये लोकतांत्रिक है ?
टिक-टॉक कहता है, हम अपना डेटा चीनी सरकार के साथ साझा नहीं करते। मगर साल 2017 में चाइना ने एक "Special Intelligence law" बनाया जिसमें यह कहा गया कि अगर साम्यवादी चाईना सरकार को किसी 'सुरक्षा कारणों' के लिए अगर किसी चीनी कंपनी से डेटा चाहिए तो वह कंपनी यह नहीं कह सकती कि ये 'प्राइवेट डेटा' हैं, उन्हें वो डेटा देना पड़ेगा।
-Some other laws of Communist Party of China
चाइना 'टेक्नोलॉजी' के मामले में आज तक एक तरफा व्यापार करते आया है। जिन 59 चाइनिस एप्स को भारत ने बैन किया वह पूरी दुनिया में फैले हुए हैं "Made in China" के नाम से। मगर चाइना में आप देखें तो यहां Google, Facebook, YouTube और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों को घुसने तक नहीं दिया गया, बल्कि इनके टेक्नोलॉजी को चोरी किया गया और इनकी ही तरह बहरूपिये बनाएं। चाइना का YouTube हैं Youku, Google हैं baidu, Facebook हैं vaibo और Amazon हैं 'अलीबाबा'।
चाइनीस पॉलिसी कहती है, 'अगर किसी विदेशी कंपनी को चाइना में व्यापार करना है, तो उसे अपना IP (Intellectual Property) देना पड़ेगा और अगर कोई विदेशी कंपनी चाइना में अपनी टेक्नोलॉजी निर्यात करके संचालित करना चाहता है, तो उसे चाइनीस कंपनी के साथ "Joint Venture" बनाना पड़ेगा।
-At Last my opinion
अपनी राय देने से पहले मैं आपको लोकप्रिय गेम 'पब्जी मोबाइल' के बारे में बताना चाहूंगा। 'पब्जी मोबाइल' एक 'साउथ कोरियन' कंपनी "Blue Hole" की है, जिसे पूरी दुनिया में युवाओं ने खूब पसंद किया, मगर केवल चाइना में इस गेम को संचालित करने के लिए, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया साउथ कोरियन कंपनी "Blue Hole" को चाइनीस 'Tech Company "Tencent" के साथ 'Joint venture' बनाना पड़ा तब जाकर चाइना में पब्जी मोबाइल को संचालित किया गया।
मेरी राय में हु-बहू केवल भारत को ही नहीं बल्कि सभी देशों को ऐसा ही करना चाहिए, चाइना अगर किसी भी देश में व्यापार करना चाहता है तो उसे उस देश के 'प्रिंसिपल' को फॉलो करना होगा। और अगर चीन किसी देश मैं अपनी टेक्नोलॉजी को संचालित करना चाहता है तो उसे उस देश के किसी 'Major tech Company' के साथ 'Joint Venture' बनाना होगा, अपनी निष्ठा अपने उपभोक्ताओं के प्रति साबित करनी होगी ना कि चीनी साम्यवाद पार्टी के प्रति। और भारत को डेटा की सुरक्षा को लेकर थोड़ा सोचना चाहिए या कोई नियम बनाना चाहिए। अब रही बात चीनी एप्स के हमेशा के लिए बैन रहने या ना रहने की तो, हम इसके बारे मैं ना ही सोचे तो बेहतर है, हमें इसके विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए अन्यथा 'विकल्पों' को 'Make in India' बनाना चाहिए।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
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