इसे आप लोग पूरा पढ़ेंगे या नहीं उससे मुझे कोई मतलब नहीं, मगर मैं जो लिखने जा रहा हूं वह मेरी अंतरात्मा की आवाज है।
पता है, सबसे ज्यादा अफसोस कब होता है जब आप किसी से उम्मीद लगाते हैं पर वह आपकी उम्मीदों को नजरअंदाज कर दे, आपकी उम्मीद पर खरा ना उत्तरे, तब होता है सबसे ज्यादा अफसोस। जब आपके परिवार के साथ या आपके साथ कुछ गलत होता है तब सबसे ज्यादा आपकी उम्मीदें किस से होती है पुलिस प्रशासन से। मगर जरा सोचिए एक आम इंसान भला क्या कर लेगा अगर येही आपकी मदद ना करें तो, कुछ कर लेंगे क्या।
पता है दिक्कत क्या है। इस कलयुग में किसी भी लड़की को छेड़ना, उसे गाली देना या अभद्र भाषा का प्रयोग करना यह सब एक आम बाते हो चुकी है, यह सब चलता है, पुलिस को भी यही लगता हैं तभी पुलिस इनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं करती और होता क्या है, वह सभी मनचले लड़के जो यह करते हैं उनको बढ़ावा मिलता है और परिणाम में वह कल को निर्भया, कठुआ, प्रियंका रेड्डी जैसे कांड करते हैं। अगर आप भी 'लड़की छेड़ना' और 'लड़की का रेप होने' में फर्क ढूंढते हैं तो कसम से आप भारत में रेप को कभी रोक नहीं पाएंगे। मगर चुक कहां हो जाती है, वही हो जाती है जहां पुलिस फर्क ढूंढने लग जाती है 'लड़कियों को छेड़ने' जैसी बात को एक छोटा अपराध समझ बैठती हैं, और 'रेप' को एक बड़ा अपराध।
एक साल पहले की बात है, उत्तर प्रदेश के 'गाजियाबाद' में एक पत्रकार जिसका नाम 'विक्रम जोशी' था, उसकी बेटियों को कुछ आवारा मनचलों ने छेड़ा, विक्रम ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई और उम्मीद लगा कर बैठे की पुलिस प्रशासन कुछ ना कुछ तो करेगी, मगर उसे यह नहीं पता था की पुलिस के लिए यह एक आम बात है। एक साल बीत गया मनचलों की हिम्मत बढ़ी और उन्होंने विक्रम की बेटियों को फिर छेड़ा घर के पास गाली गलौज की। एक बार फिर विक्रम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, मगर फिर पुलिस चुप रही। विक्रम उम्मीद लगाकर बैठे रहे। मगर मनचलों की हिम्मत इस बार कुछ इस प्रकार बढ़ी कि उनके इरादे कुछ ऐसे थे।
"हम तुम्हारी बहन, बेटियों को छेड़ेंगे, उन्हें गालियां देंगे, गंदी गंदी बातें कहेंगे मगर तुम विरोध मत करना यह सब हम तुम्हारे सामने करेंगे, तुम्हारे घर में घुसकर करेंगे मगर तुम विरोध मत करना अगर करोगे तो" !!
दिनांक 20 जुलाई रात के करीब 10 बजकर 30 मिनट के पास 'विक्रम जोशी' को उन्हीं मनचलों ने उसही के घर के पास सड़क पर उसकी मोटरसाइकिल रोककर उसही की बेटियों के सामने उसे पीटा और सर में गोली मार दी।
अफसोस सिर्फ इस बात का है, की जितनी हिम्मत यह मामूली गुंडे दिखाते हैं ना, उतनी ही हिम्मत पुलिस दिखाने लग जाए तो, आज दुनिया के कई बड़े बड़े अपराध होने से बच जाए। यह बहुत बड़ी बात कह दी मैंने, जबकि हकीकत इससे बहुत परे है। हकीकत में पुलिस इंतजार करती है, खून बहने का, आंसू बहने के और फिर गिरफ्तार करती है। अंत में गया किसका, पुलिस का,,?? 'कुछ नहीं',, आपका गया सब, अब थोड़ा आसु बहाईए, एक मिनट कहीं आपको "System" पर गुस्सा तो नहीं आ रहा, अच्छा ये लीजिए 'दस लाख' रखिए जेब में, और खुश रहिए। और हां,, खबरदार जो "System" बदलने की कोशिश की तो, वो तुम्हारे औकात के परे है।
नमस्कार, राहुल सिंह द्वारा
Wednesday, 22 July 2020
Tuesday, 7 July 2020
CASE STUDY ON CORONA VICTIMS
Brief And Origin of 'n-COVID -19'
साल 2002 में 'बिल्ली'(Cat) से इंसानी शरीर मैं एक वायरस आया, जिसे 'SAARS' नाम से जाना गया, फिर इसी के जैसा 'MERS' वायरस आया जो इंसानी शरीर में 'ऊंट'(Camel) के जरिए आया।
दिसंबर 2019 चीन के वुहान जिले में अचानक से 'निमोनिया' के मरीज बढ़ने लगे, जब उन मरीजों पे किसी भी दवाई का असर नहीं हुआ, तब चीनी वैज्ञानिकों ने खोज करना शुरू किया, जिसमें चाइना के 'सीफूड सिटी''Quanan Seafood Holesale Market' का नाम सामने आया, जहां सांप, केकड़ा, मछली, चमगादड़ व अन्य जीव खाए जाते हैं। इसके बाद जब सभी मरीजों का जांच(Test) किया गया, तब एक नए प्रकार का वायरस सामने निकल कर आया जो लगभग 'SAARS' वायरस के जैसा ही था, जिसे "नोवल कोरोना वायरस" या n- COVID -19 के नाम से जाना गया।
बात करें कोरोना वायरस के मृत्यु दर की तो यह मात्र 3% है। कोरोना वायरस से उस ही व्यक्ति की मौत होती है, जिसका 'इम्यून सिस्टम' कमजोर होता हैं, जैसे बुजुर्ग और बच्चे। अधिकतर मौतों की वजह या तो बेहद खतरनाक निमोनिया हो जाना या फिर इसके कारण आपकी किडनी का फेल हो जाना है। कोरोना वायरस अधिकतर हवा में बूंदों के कारण फैलता है, यानी कि जब कोरोना ग्रसित कोई छीकता या खास्ता है, तो मुंह से निकली बूंदे सामने वाले को कोरोना संक्रमित कर सकती है। माना जाता है की कोरोना वायरस अपने लक्षण 2 से 14 दिनों में दिखाता है। मगर कई बार जांच के बाद भी इसके लक्षण को पकड़ पाना मुश्किल होता है। कुछ ऐसा ही दिल्ली में एक मरीज के साथ हुआ
Patient name : Jit Singh (ASI in Delhi Police, 'Haujkhash')
Age: '57' year'
Place where he infected And Initial Symptoms
दिनांक: 30-मार्च को 'जीत सिंह' की ड्यूटी दिल्ली के 'युसूफ सराय' इलाके में थी। ड्यूटी से वापस घर लौटने के दौरान जीत सिंह के शरीर में दर्द शुरू हो गया, वह बताते हैं रात तक दर्द इतना बढ़ गया कि उन्हें दर्द की दवाई खानी पड़ी, रात भर के लिए तो उन्हें उस दर्द से आराम मिल गया, मगर अगले दिन 31-मार्च को वह दोबारा ड्यूटी पर गए और फिर से उनके शरीर में तेज दर्द होने लगा, उन्होंने अपने TI अफसर को बताया, कि मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होते जा रही है। अफसर ने उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी। दिनांक 1-अप्रैल को वह 'ऐम्स अस्पताल' गए, जहां डॉक्टरों ने मेंरा बीपी और तापमान चेक किया, उसके बाद उन्होंने मेरा कोरोना का भी जांच किया और कहा आप में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, आप 14 दिन के लिए 'Home quarantine' रहिये।
HOME QUARANTINE (Phase-1)
दिनांक 1-अप्रैल को अस्पताल से घर आने के बाद जीत सिंह अपने आप को सबसे अलग करके 14 दिन के लिए 'Home quarantine' किया। जीत बताते हैं, क्वारंटाइन होने के बाद भी मेरा तापमान और बुखार वैसा का वैसा ही रहा, हर बार 103-104 बुखार रहता था। उनके परिवार वालों ने 'Home Quarantine' के दोरान उनकी अच्छे से खातेदारी की, उनको हर वक्त पपीता और अन्य फल खिलाया। परिवार को हमेशा से डर बना रहता था, कि कहीं जीत को कोरोना वायरस ना हो जाए।
After Home Quarantine
'होम क्वॉरेंटाइन' से कोई आराम ना मिलने के बाद, जित उसके बाद 'बंसल' अस्पताल मे गए। उसमें उन्होंने अपना TFT, PFT, मलेरिया, टाइफाइड आदि, सब चेक करवाया। उसके बाद उन्हें एक डॉक्टर ने सलाह दी 'कि आप अपना कोरोना टेस्ट भी करा लीजिए' जीत ने कोरोना का जांच फिर से करवाया, मगर वह भी फिर नेगेटिव आई। इसके बाद वह इतना परेशान हो गए की वह ड्यूटी पर भी नहीं जाते थे, और घर पर आराम करते थे मगर दिनांक 21-अप्रैल को जीत ने एक बार फिर हिम्मत की और अपने क्षेत्र में गए, वहां उन्होंने अपने सीनियर अफसरों को एक बार फिर बताया कि मेरी तबीयत ज्यादा खराब हो रही है, सांस लेने में समस्या होने लगी है और बुखार पिछले एक हफ्ते से 103-104 बना रह रहा है। उसके बाद जीत के अफसर उसे सफदरगंज ले गए फिर 'एम्स' ले गए वहां उन्होंने अपना कोरोना का तीसरी बार चेकअप कराया। दिनांक 22-अप्रैल हौज खास के 'डैग लैब' से ठीक शाम के 6:30 मिनट पर मेरी रिपोर्ट आ गई जिसमें मेरा 'n- COVID-19' पॉजिटिव आया। जीत का कुल तीन बार कोरोना का जांच हुआ जिस में से वह तीसरी बार में पाजिटिव पाए गए।
His Reaction After 'COVID-19' Positive
जीत बताते हैं जब उन्हें मालूम चला कि वह 'कोविड-19' पॉजिटिव हैं तब उन्हें यकीन नहीं हुआ। उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी अपने अंदर कोरोना वायरस के लक्ष्ण को पहचानने में आई दिक्कतों के कारण हुई, क्योंकि पिछली दो बार जब उन्होंने अपना कोरोना वायरस का जांच करवाया था, तो वह दोनों बार नेगेटिव पाए गए थे, मगर तीसरी बार पॉजिटिव हो गए। उसके बाद धैर्य से काम लेते हुए वह अपने घर गए और अपने बच्चों से कहा तुम लोग यहीं रहो, मैं कुछ दिनों के लिए अस्पताल जा रहा हूं, वह अपने बड़े बेटे को लेकर अस्पताल गए, और वहां उन्हें अपने सीनियर अफसर मिले। अस्पताल के स्टाफ मौके पर सारे वही मिले, जिन्होंने मुझे भर्ती कराया अस्पताल में। जीत बताते हैं, कि जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह खुश हुए क्योंकि उन्हें मालूम था, कि अब मैं ठीक हो जाऊंगा।
HOSPITAL QUARANTINE (Phase -2)
सफदरगंज हॉस्पिटल मैं उन्हें दिनांक 22-अप्रैल, श्याम 8:00 बजे क्वारंटाइन कर दिया गया। उन्हें शुरुआती में अलग से कपड़े दिए गए, मुंह पर लगाने के लिए मास्क दिया गया और हाथों को हमेशा साफ रखने के लिए 'सैनिटाइजर' भी दिया गया। इसके बाद उनका रोज इलाज चला जिसमें ऐसी कोई डरने वाली बात नहीं थी, उन्हें इलाज के दौरान कोई दर्द महसूस भी नहीं हुआ। हालांकि बीच-बीच मेंं उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, तब उन्हें ऑक्सीजन दिया गया, AC या पंखा चलाना सख्त मना था, जिसके कारण जीत सिंह बताते हैं उनकी 'टी-शर्ट' रात में पसीने से पूरी भीग जाती थी। हॉस्पिटल के कर्मचारी हर 10 मिनट बाद मरीजों के पास उनका हालचाल जानने के लिए आते थे, और खाना हर रोज तीन वक़्त का मिलता था। जिस कमरे में जीत भर्ती थे उसी कमरे में कोविड-19 का ही एक और मरीज भी भर्ती था, मगर दोनों की दूरी को बनाकर रखा गया था। वह दोनों सुबह और शाम 'प्राणायाम' भी किया करते थे, जिससे उन्हें काफी आराम महसूस होता था। जीत बताते हैं हॉस्पिटल में साफ सफाई को लेकर खास ध्यान रखा जाता था, हॉस्पिटल का हर एक कर्मचारी अपने आप को 'PPE' किट से ढक कर रखता था। हॉस्पिटल के सभी डॉक्टरों ने भी मुझे सलाह दी की 'घबराने की कोई बात नहीं है, आप एक सामान्य मरीज की तरह रहो, आप बहुत जल्द ठीक हो जाओगे'।
Expectations VS Reality
जीत बताते हैं, कि उनके दिमाग में कभी भी यह फील नहीं हुआ, कि मुझे कोरोना वायरस हो सकता है, उनके दिमाग में था कि वह एक सामान्य बीमारी से ग्रसित हुए हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी, उनके दिमाग में यह कभी भी रहा ही नहीं, कि उन्हें कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी कभी हो जाएगी। उन्हें लगा की मुझे कुछ दिन इलाज मिलेगा और मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा। उन्हें शुरुआती में लगा था, कि कोरोना वायरस के इलाज में शायद दर्द की मात्रा अधिक होगी, मगर हकीकत इसके कुल विप विपरीतरीत थी। वह जब बीमार थे, तो उन्हें लगता था कि उनके अफसर और दूसरे पुलिस वाले उनसे दूर भागेंगे मगर हकीकत में कुछ को छोड़कर उनके अफसरों ने जीत की बहुत मदद की। वह बताते हैं जांच में दो बार 'नेगेटिव' आने पर उन्हें पूरा यकीन हो गया था, कि मुझे 'कोविड-19' नहीं है, मगर जब तीसरी बार जांच कराया तो परिणाम हैरान कर देने वाला था
Message from 'Jit Singh' to other Corona Victims
जीत सिंह कुल 11 दिनों के अंदर यानी कि 3-मई को कोविड-19 को मात देकर अपने घर वापस लौटे। जहां उनका उनके परिवार वालों ने स्वागत किया। और दिनांक 6 मई से जीत सिंह दोबारा अपनी ड्यूटी पर गए। जीत सिंह कहते हैं, कोरोना वायरस से लड़ना है तो सबसे ज्यादा 'धैर्य' और 'संयम' बना कर रखना जरूरी है। इसके अलावा इसे दिमाग पर ना ले कि मुझे कोरोना, कोरोना है, हमें हो जाएगा,। डॉक्टर और प्रशासन द्वारा बताए गए सभी नियमों का पालन करें खुद से कोई भी काम ना करें, अपने परिवार से तभी मिले जब आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाए और जिस तरीके से मैं 4 से 5 दिन में रिकवर हुआ वैसे ही आप भी 4 से 5 दिनों में ही ठीक हो जाएंगे, बशर्ते घबराएं ना और संयम बना के रखें।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
साल 2002 में 'बिल्ली'(Cat) से इंसानी शरीर मैं एक वायरस आया, जिसे 'SAARS' नाम से जाना गया, फिर इसी के जैसा 'MERS' वायरस आया जो इंसानी शरीर में 'ऊंट'(Camel) के जरिए आया।
दिसंबर 2019 चीन के वुहान जिले में अचानक से 'निमोनिया' के मरीज बढ़ने लगे, जब उन मरीजों पे किसी भी दवाई का असर नहीं हुआ, तब चीनी वैज्ञानिकों ने खोज करना शुरू किया, जिसमें चाइना के 'सीफूड सिटी''Quanan Seafood Holesale Market' का नाम सामने आया, जहां सांप, केकड़ा, मछली, चमगादड़ व अन्य जीव खाए जाते हैं। इसके बाद जब सभी मरीजों का जांच(Test) किया गया, तब एक नए प्रकार का वायरस सामने निकल कर आया जो लगभग 'SAARS' वायरस के जैसा ही था, जिसे "नोवल कोरोना वायरस" या n- COVID -19 के नाम से जाना गया।
बात करें कोरोना वायरस के मृत्यु दर की तो यह मात्र 3% है। कोरोना वायरस से उस ही व्यक्ति की मौत होती है, जिसका 'इम्यून सिस्टम' कमजोर होता हैं, जैसे बुजुर्ग और बच्चे। अधिकतर मौतों की वजह या तो बेहद खतरनाक निमोनिया हो जाना या फिर इसके कारण आपकी किडनी का फेल हो जाना है। कोरोना वायरस अधिकतर हवा में बूंदों के कारण फैलता है, यानी कि जब कोरोना ग्रसित कोई छीकता या खास्ता है, तो मुंह से निकली बूंदे सामने वाले को कोरोना संक्रमित कर सकती है। माना जाता है की कोरोना वायरस अपने लक्षण 2 से 14 दिनों में दिखाता है। मगर कई बार जांच के बाद भी इसके लक्षण को पकड़ पाना मुश्किल होता है। कुछ ऐसा ही दिल्ली में एक मरीज के साथ हुआ
Patient name : Jit Singh (ASI in Delhi Police, 'Haujkhash')
Age: '57' year'
Place where he infected And Initial Symptoms
दिनांक: 30-मार्च को 'जीत सिंह' की ड्यूटी दिल्ली के 'युसूफ सराय' इलाके में थी। ड्यूटी से वापस घर लौटने के दौरान जीत सिंह के शरीर में दर्द शुरू हो गया, वह बताते हैं रात तक दर्द इतना बढ़ गया कि उन्हें दर्द की दवाई खानी पड़ी, रात भर के लिए तो उन्हें उस दर्द से आराम मिल गया, मगर अगले दिन 31-मार्च को वह दोबारा ड्यूटी पर गए और फिर से उनके शरीर में तेज दर्द होने लगा, उन्होंने अपने TI अफसर को बताया, कि मेरी तबीयत बहुत ज्यादा खराब होते जा रही है। अफसर ने उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी। दिनांक 1-अप्रैल को वह 'ऐम्स अस्पताल' गए, जहां डॉक्टरों ने मेंरा बीपी और तापमान चेक किया, उसके बाद उन्होंने मेरा कोरोना का भी जांच किया और कहा आप में कोरोना के कोई लक्षण नहीं है, आप 14 दिन के लिए 'Home quarantine' रहिये।
HOME QUARANTINE (Phase-1)
दिनांक 1-अप्रैल को अस्पताल से घर आने के बाद जीत सिंह अपने आप को सबसे अलग करके 14 दिन के लिए 'Home quarantine' किया। जीत बताते हैं, क्वारंटाइन होने के बाद भी मेरा तापमान और बुखार वैसा का वैसा ही रहा, हर बार 103-104 बुखार रहता था। उनके परिवार वालों ने 'Home Quarantine' के दोरान उनकी अच्छे से खातेदारी की, उनको हर वक्त पपीता और अन्य फल खिलाया। परिवार को हमेशा से डर बना रहता था, कि कहीं जीत को कोरोना वायरस ना हो जाए।
After Home Quarantine
'होम क्वॉरेंटाइन' से कोई आराम ना मिलने के बाद, जित उसके बाद 'बंसल' अस्पताल मे गए। उसमें उन्होंने अपना TFT, PFT, मलेरिया, टाइफाइड आदि, सब चेक करवाया। उसके बाद उन्हें एक डॉक्टर ने सलाह दी 'कि आप अपना कोरोना टेस्ट भी करा लीजिए' जीत ने कोरोना का जांच फिर से करवाया, मगर वह भी फिर नेगेटिव आई। इसके बाद वह इतना परेशान हो गए की वह ड्यूटी पर भी नहीं जाते थे, और घर पर आराम करते थे मगर दिनांक 21-अप्रैल को जीत ने एक बार फिर हिम्मत की और अपने क्षेत्र में गए, वहां उन्होंने अपने सीनियर अफसरों को एक बार फिर बताया कि मेरी तबीयत ज्यादा खराब हो रही है, सांस लेने में समस्या होने लगी है और बुखार पिछले एक हफ्ते से 103-104 बना रह रहा है। उसके बाद जीत के अफसर उसे सफदरगंज ले गए फिर 'एम्स' ले गए वहां उन्होंने अपना कोरोना का तीसरी बार चेकअप कराया। दिनांक 22-अप्रैल हौज खास के 'डैग लैब' से ठीक शाम के 6:30 मिनट पर मेरी रिपोर्ट आ गई जिसमें मेरा 'n- COVID-19' पॉजिटिव आया। जीत का कुल तीन बार कोरोना का जांच हुआ जिस में से वह तीसरी बार में पाजिटिव पाए गए।
His Reaction After 'COVID-19' Positive
जीत बताते हैं जब उन्हें मालूम चला कि वह 'कोविड-19' पॉजिटिव हैं तब उन्हें यकीन नहीं हुआ। उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी अपने अंदर कोरोना वायरस के लक्ष्ण को पहचानने में आई दिक्कतों के कारण हुई, क्योंकि पिछली दो बार जब उन्होंने अपना कोरोना वायरस का जांच करवाया था, तो वह दोनों बार नेगेटिव पाए गए थे, मगर तीसरी बार पॉजिटिव हो गए। उसके बाद धैर्य से काम लेते हुए वह अपने घर गए और अपने बच्चों से कहा तुम लोग यहीं रहो, मैं कुछ दिनों के लिए अस्पताल जा रहा हूं, वह अपने बड़े बेटे को लेकर अस्पताल गए, और वहां उन्हें अपने सीनियर अफसर मिले। अस्पताल के स्टाफ मौके पर सारे वही मिले, जिन्होंने मुझे भर्ती कराया अस्पताल में। जीत बताते हैं, कि जब उन्हें भर्ती किया गया तो वह खुश हुए क्योंकि उन्हें मालूम था, कि अब मैं ठीक हो जाऊंगा।
HOSPITAL QUARANTINE (Phase -2)
सफदरगंज हॉस्पिटल मैं उन्हें दिनांक 22-अप्रैल, श्याम 8:00 बजे क्वारंटाइन कर दिया गया। उन्हें शुरुआती में अलग से कपड़े दिए गए, मुंह पर लगाने के लिए मास्क दिया गया और हाथों को हमेशा साफ रखने के लिए 'सैनिटाइजर' भी दिया गया। इसके बाद उनका रोज इलाज चला जिसमें ऐसी कोई डरने वाली बात नहीं थी, उन्हें इलाज के दौरान कोई दर्द महसूस भी नहीं हुआ। हालांकि बीच-बीच मेंं उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, तब उन्हें ऑक्सीजन दिया गया, AC या पंखा चलाना सख्त मना था, जिसके कारण जीत सिंह बताते हैं उनकी 'टी-शर्ट' रात में पसीने से पूरी भीग जाती थी। हॉस्पिटल के कर्मचारी हर 10 मिनट बाद मरीजों के पास उनका हालचाल जानने के लिए आते थे, और खाना हर रोज तीन वक़्त का मिलता था। जिस कमरे में जीत भर्ती थे उसी कमरे में कोविड-19 का ही एक और मरीज भी भर्ती था, मगर दोनों की दूरी को बनाकर रखा गया था। वह दोनों सुबह और शाम 'प्राणायाम' भी किया करते थे, जिससे उन्हें काफी आराम महसूस होता था। जीत बताते हैं हॉस्पिटल में साफ सफाई को लेकर खास ध्यान रखा जाता था, हॉस्पिटल का हर एक कर्मचारी अपने आप को 'PPE' किट से ढक कर रखता था। हॉस्पिटल के सभी डॉक्टरों ने भी मुझे सलाह दी की 'घबराने की कोई बात नहीं है, आप एक सामान्य मरीज की तरह रहो, आप बहुत जल्द ठीक हो जाओगे'।
Expectations VS Reality
जीत बताते हैं, कि उनके दिमाग में कभी भी यह फील नहीं हुआ, कि मुझे कोरोना वायरस हो सकता है, उनके दिमाग में था कि वह एक सामान्य बीमारी से ग्रसित हुए हैं, जो कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी, उनके दिमाग में यह कभी भी रहा ही नहीं, कि उन्हें कोरोना जैसी खतरनाक बीमारी कभी हो जाएगी। उन्हें लगा की मुझे कुछ दिन इलाज मिलेगा और मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊंगा। उन्हें शुरुआती में लगा था, कि कोरोना वायरस के इलाज में शायद दर्द की मात्रा अधिक होगी, मगर हकीकत इसके कुल विप विपरीतरीत थी। वह जब बीमार थे, तो उन्हें लगता था कि उनके अफसर और दूसरे पुलिस वाले उनसे दूर भागेंगे मगर हकीकत में कुछ को छोड़कर उनके अफसरों ने जीत की बहुत मदद की। वह बताते हैं जांच में दो बार 'नेगेटिव' आने पर उन्हें पूरा यकीन हो गया था, कि मुझे 'कोविड-19' नहीं है, मगर जब तीसरी बार जांच कराया तो परिणाम हैरान कर देने वाला था
Message from 'Jit Singh' to other Corona Victims
जीत सिंह कुल 11 दिनों के अंदर यानी कि 3-मई को कोविड-19 को मात देकर अपने घर वापस लौटे। जहां उनका उनके परिवार वालों ने स्वागत किया। और दिनांक 6 मई से जीत सिंह दोबारा अपनी ड्यूटी पर गए। जीत सिंह कहते हैं, कोरोना वायरस से लड़ना है तो सबसे ज्यादा 'धैर्य' और 'संयम' बना कर रखना जरूरी है। इसके अलावा इसे दिमाग पर ना ले कि मुझे कोरोना, कोरोना है, हमें हो जाएगा,। डॉक्टर और प्रशासन द्वारा बताए गए सभी नियमों का पालन करें खुद से कोई भी काम ना करें, अपने परिवार से तभी मिले जब आप पूरी तरह से स्वस्थ हो जाए और जिस तरीके से मैं 4 से 5 दिन में रिकवर हुआ वैसे ही आप भी 4 से 5 दिनों में ही ठीक हो जाएंगे, बशर्ते घबराएं ना और संयम बना के रखें।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
Sunday, 5 July 2020
अब डिजिटल वार भी
भारतीय सरकार ने चाइना के कुल 59 एप्स पर बैन लगा कर डिजिटल वार की शुरुआत कर दी है, मगर क्या ये बैन हमेशा के लिए रहने वाला है या फिर जब तक भारत और चीन का सीमा विवाद चलेगा तब तक, कहीं यह बैन भारतीय लोगों के चीन के प्रति विरोध प्रदर्शन को देखते हुए मजबूरी में तो नहीं किया गया। यह सब मैं आपको आगे बताऊंगा। मगर आइए पहले जरा मामले को समझते हैं।
-Negative impacts (Demerits of ban Chinese apps)
जरा गहराई से सोचिए क्या कोई केवल 15 सेकंड की वीडियो मैं अपना हुनर दिखा सकता है, क्या कोई 15 सेकंड की रोज वीडियो बनाकर प्रसिद्धि पा सकता है, जी हां, यह सब संभव हुआ केवल टिक-टॉक जैसे ऐप के वजह से। मगर टिक टॉक, यूसी ब्राउजर, यूसी न्यूज़ और शेयर इट जैसे बड़ी कंपनियों पर बैन लगने से ना सिर्फ कई लोगों के लिए हुनर का प्लेटफार्म छीना बल्कि इन कंपनियों को भारत में चलाने वाले कई लोग और पत्रकार जो यूसी न्यूज़ में अपना आर्टिकल देते थे उनके हाथों से रोजगार भी छीना, वह सब अब बेरोजगार हो गाए। कहीं ऐसा तो नहीं चीन के साथ सीमा विवाद के बदले की भावना में भारत खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है, क्योंकि भारत में लोकडाउन के बाद वैसे भी बेरोजगारी दर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार ने इन चाइनीस ऐप्स को बैन करके बेरोजगारी की दर को दुगना करने का काम किया हैं।
बात करें आंकड़ों की तो भारत में टिक-टॉक का हेड क्वार्टर 'मुंबई' में हैं, जहां लगभग दो हजार लोग इसमें काम करते थे। टिक-टॉक सबसे ज्यादा भारत में उपयोग किया जाता है, लगभग 30% यानी कि 12 करोड़ एक्टिव यूजर्स भारत में है, यूसी ब्राउजर के भी 12 करोड़ यूजर हैं, शेयर इट के 20 करोड़, क्लब फैक्ट्री और कैमस्कैनर के 10 करोड़ यूजर्स हैं। अब कई लोगों का कहना है, केवल चाइनीस एप्स को ही क्यों बैन किया गया और इससे क्या होगा। आइए बात करते हैं।
-Why only Chinese apps and its consequences
बात करें चाइनीस एप्स के केवल बैन होने की तो आपको बता दे, 'टिक-टॉक' US और ऑस्ट्रेलिया मिलिट्री में भी बैन है, इसकी बड़ी वजह ये है, की टिक-टॉक डेटा चोरी करके कहीं दूसरे सर्वर पर भेजता है जिसकी खोज 'European data protection authority' और USA भी करने में लगा हुआ है। टिक-टॉक अपनी 'Privacy policy' में खुद कहता है- 'we collect information about your location, including location information based on your SIM Card and IP address' लीजिए आपको बता दें 'गूगल मैप' और 'आरोग्य सेतु' जैसे जरूरी एप्स भी आपका लोकेशन और डाटा नहीं ले सकते बिना आपके इजाजत के। इसके अलावा दूसरा कारण 'Club factory' ऐप का है जो कि एक 'E-Commerce' कंपनी है, ये बिना 'कस्टम ड्यूटी' यानी कि 'टैक्स' दिए बिना अपने ऑर्डर की डिलीवरी उपभोक्ताओं तक करती है, इसको लेकर लोगों ने भी बहुत सवाल उठाए।
अब बात करें परिणाम की तो यह पहली बार नहीं है जब टिक-टॉक को भारत ने बैन किया, इससे पहले साल 2018 मैं भी टिक-टॉक को बैन किया गया, यह कहकर की 'टिक-टॉक "चाइल्ड पोर्नोग्राफी" जैसे कंटेंट दिखाता है' और तब "बाइटडांस" को रोज 500 लाख US डॉलर का घाटा सहना पड़ा था। अब आज भारत में टिक टॉक के फिर बैन होने से चीन को 10% का घाटा सहना पड रहा है 'uninstalling' की वजह से। परिणाम में चीन ने भी भारत के 'न्यूज वेबसाइट्स' और 'ई-अखबार' बैन कर दिए हैं, चीनी दूतावास ने यहां तक विरोध किया और नाराजगी भी जताई। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी 'ByteDanceltd' के टिक-टॉक समेत तीन एप्स पर बैन लगने से कंपनी को 6 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान भी है।
-Tik-Tok update statement VS Facts check
भारत में 'टिक-टॉक' के प्रमुख 'निखिल गांधी' ने टिक-टॉक बंद होने के बाद एक 'अपडेट' जारी किया जिसमें ये कहा गया:- 'हम भारत सरकार के अंतिम आदेश को मानने की प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैं, टिक टॉक डेटा की निजता और भारतीय क़ानून के हिसाब से सुरक्षा ज़रूरतों का पालन करता है। हम भारतीयों का डेटा किसी भी विदेशी सरकार के साथ, यहां तक चीनी सरकार के साथ भी साझा नहीं करते। हम उच्च श्रेणी का दर्जा देते हैं, अपने उपभोक्ताओं को 'गोपनीयता' और 'अखंडता' के प्रति।
टिक-टॉक ने 'इंटरनेट का 'लोकतांत्रिक करण' किया है, यह सौ-करोड़ उपभोक्ताओं के साथ, 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। जिसमें कलाकार, कहानी वाचक, शिक्षा और प्रस्तुतकर्ता, आधारित हैं अपना घर-बार चलाने के लिए।
-Facts check
'सलोनी गौर नजमा' जो टिक-टॉक पर कॉमेडी-वीडियो बनाया करती थी, जिसमें वो चाइनीस सरकार की आलोचना करती थी, मगर उसकी वीडियो हर बार हटा दी गई, क्या यह लोकतांत्रिक है ?, बिना पूछे आपका डेटा और लोकेशन की जानकारी लेना, क्या ये लोकतांत्रिक है ?
टिक-टॉक कहता है, हम अपना डेटा चीनी सरकार के साथ साझा नहीं करते। मगर साल 2017 में चाइना ने एक "Special Intelligence law" बनाया जिसमें यह कहा गया कि अगर साम्यवादी चाईना सरकार को किसी 'सुरक्षा कारणों' के लिए अगर किसी चीनी कंपनी से डेटा चाहिए तो वह कंपनी यह नहीं कह सकती कि ये 'प्राइवेट डेटा' हैं, उन्हें वो डेटा देना पड़ेगा।
-Some other laws of Communist Party of China
चाइना 'टेक्नोलॉजी' के मामले में आज तक एक तरफा व्यापार करते आया है। जिन 59 चाइनिस एप्स को भारत ने बैन किया वह पूरी दुनिया में फैले हुए हैं "Made in China" के नाम से। मगर चाइना में आप देखें तो यहां Google, Facebook, YouTube और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों को घुसने तक नहीं दिया गया, बल्कि इनके टेक्नोलॉजी को चोरी किया गया और इनकी ही तरह बहरूपिये बनाएं। चाइना का YouTube हैं Youku, Google हैं baidu, Facebook हैं vaibo और Amazon हैं 'अलीबाबा'।
चाइनीस पॉलिसी कहती है, 'अगर किसी विदेशी कंपनी को चाइना में व्यापार करना है, तो उसे अपना IP (Intellectual Property) देना पड़ेगा और अगर कोई विदेशी कंपनी चाइना में अपनी टेक्नोलॉजी निर्यात करके संचालित करना चाहता है, तो उसे चाइनीस कंपनी के साथ "Joint Venture" बनाना पड़ेगा।
-At Last my opinion
अपनी राय देने से पहले मैं आपको लोकप्रिय गेम 'पब्जी मोबाइल' के बारे में बताना चाहूंगा। 'पब्जी मोबाइल' एक 'साउथ कोरियन' कंपनी "Blue Hole" की है, जिसे पूरी दुनिया में युवाओं ने खूब पसंद किया, मगर केवल चाइना में इस गेम को संचालित करने के लिए, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया साउथ कोरियन कंपनी "Blue Hole" को चाइनीस 'Tech Company "Tencent" के साथ 'Joint venture' बनाना पड़ा तब जाकर चाइना में पब्जी मोबाइल को संचालित किया गया।
मेरी राय में हु-बहू केवल भारत को ही नहीं बल्कि सभी देशों को ऐसा ही करना चाहिए, चाइना अगर किसी भी देश में व्यापार करना चाहता है तो उसे उस देश के 'प्रिंसिपल' को फॉलो करना होगा। और अगर चीन किसी देश मैं अपनी टेक्नोलॉजी को संचालित करना चाहता है तो उसे उस देश के किसी 'Major tech Company' के साथ 'Joint Venture' बनाना होगा, अपनी निष्ठा अपने उपभोक्ताओं के प्रति साबित करनी होगी ना कि चीनी साम्यवाद पार्टी के प्रति। और भारत को डेटा की सुरक्षा को लेकर थोड़ा सोचना चाहिए या कोई नियम बनाना चाहिए। अब रही बात चीनी एप्स के हमेशा के लिए बैन रहने या ना रहने की तो, हम इसके बारे मैं ना ही सोचे तो बेहतर है, हमें इसके विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए अन्यथा 'विकल्पों' को 'Make in India' बनाना चाहिए।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
-Negative impacts (Demerits of ban Chinese apps)
जरा गहराई से सोचिए क्या कोई केवल 15 सेकंड की वीडियो मैं अपना हुनर दिखा सकता है, क्या कोई 15 सेकंड की रोज वीडियो बनाकर प्रसिद्धि पा सकता है, जी हां, यह सब संभव हुआ केवल टिक-टॉक जैसे ऐप के वजह से। मगर टिक टॉक, यूसी ब्राउजर, यूसी न्यूज़ और शेयर इट जैसे बड़ी कंपनियों पर बैन लगने से ना सिर्फ कई लोगों के लिए हुनर का प्लेटफार्म छीना बल्कि इन कंपनियों को भारत में चलाने वाले कई लोग और पत्रकार जो यूसी न्यूज़ में अपना आर्टिकल देते थे उनके हाथों से रोजगार भी छीना, वह सब अब बेरोजगार हो गाए। कहीं ऐसा तो नहीं चीन के साथ सीमा विवाद के बदले की भावना में भारत खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है, क्योंकि भारत में लोकडाउन के बाद वैसे भी बेरोजगारी दर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, ऐसे में सरकार ने इन चाइनीस ऐप्स को बैन करके बेरोजगारी की दर को दुगना करने का काम किया हैं।
बात करें आंकड़ों की तो भारत में टिक-टॉक का हेड क्वार्टर 'मुंबई' में हैं, जहां लगभग दो हजार लोग इसमें काम करते थे। टिक-टॉक सबसे ज्यादा भारत में उपयोग किया जाता है, लगभग 30% यानी कि 12 करोड़ एक्टिव यूजर्स भारत में है, यूसी ब्राउजर के भी 12 करोड़ यूजर हैं, शेयर इट के 20 करोड़, क्लब फैक्ट्री और कैमस्कैनर के 10 करोड़ यूजर्स हैं। अब कई लोगों का कहना है, केवल चाइनीस एप्स को ही क्यों बैन किया गया और इससे क्या होगा। आइए बात करते हैं।
-Why only Chinese apps and its consequences
बात करें चाइनीस एप्स के केवल बैन होने की तो आपको बता दे, 'टिक-टॉक' US और ऑस्ट्रेलिया मिलिट्री में भी बैन है, इसकी बड़ी वजह ये है, की टिक-टॉक डेटा चोरी करके कहीं दूसरे सर्वर पर भेजता है जिसकी खोज 'European data protection authority' और USA भी करने में लगा हुआ है। टिक-टॉक अपनी 'Privacy policy' में खुद कहता है- 'we collect information about your location, including location information based on your SIM Card and IP address' लीजिए आपको बता दें 'गूगल मैप' और 'आरोग्य सेतु' जैसे जरूरी एप्स भी आपका लोकेशन और डाटा नहीं ले सकते बिना आपके इजाजत के। इसके अलावा दूसरा कारण 'Club factory' ऐप का है जो कि एक 'E-Commerce' कंपनी है, ये बिना 'कस्टम ड्यूटी' यानी कि 'टैक्स' दिए बिना अपने ऑर्डर की डिलीवरी उपभोक्ताओं तक करती है, इसको लेकर लोगों ने भी बहुत सवाल उठाए।
अब बात करें परिणाम की तो यह पहली बार नहीं है जब टिक-टॉक को भारत ने बैन किया, इससे पहले साल 2018 मैं भी टिक-टॉक को बैन किया गया, यह कहकर की 'टिक-टॉक "चाइल्ड पोर्नोग्राफी" जैसे कंटेंट दिखाता है' और तब "बाइटडांस" को रोज 500 लाख US डॉलर का घाटा सहना पड़ा था। अब आज भारत में टिक टॉक के फिर बैन होने से चीन को 10% का घाटा सहना पड रहा है 'uninstalling' की वजह से। परिणाम में चीन ने भी भारत के 'न्यूज वेबसाइट्स' और 'ई-अखबार' बैन कर दिए हैं, चीनी दूतावास ने यहां तक विरोध किया और नाराजगी भी जताई। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी कंपनी 'ByteDanceltd' के टिक-टॉक समेत तीन एप्स पर बैन लगने से कंपनी को 6 बिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान भी है।
-Tik-Tok update statement VS Facts check
भारत में 'टिक-टॉक' के प्रमुख 'निखिल गांधी' ने टिक-टॉक बंद होने के बाद एक 'अपडेट' जारी किया जिसमें ये कहा गया:- 'हम भारत सरकार के अंतिम आदेश को मानने की प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैं, टिक टॉक डेटा की निजता और भारतीय क़ानून के हिसाब से सुरक्षा ज़रूरतों का पालन करता है। हम भारतीयों का डेटा किसी भी विदेशी सरकार के साथ, यहां तक चीनी सरकार के साथ भी साझा नहीं करते। हम उच्च श्रेणी का दर्जा देते हैं, अपने उपभोक्ताओं को 'गोपनीयता' और 'अखंडता' के प्रति।
टिक-टॉक ने 'इंटरनेट का 'लोकतांत्रिक करण' किया है, यह सौ-करोड़ उपभोक्ताओं के साथ, 14 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। जिसमें कलाकार, कहानी वाचक, शिक्षा और प्रस्तुतकर्ता, आधारित हैं अपना घर-बार चलाने के लिए।
-Facts check
'सलोनी गौर नजमा' जो टिक-टॉक पर कॉमेडी-वीडियो बनाया करती थी, जिसमें वो चाइनीस सरकार की आलोचना करती थी, मगर उसकी वीडियो हर बार हटा दी गई, क्या यह लोकतांत्रिक है ?, बिना पूछे आपका डेटा और लोकेशन की जानकारी लेना, क्या ये लोकतांत्रिक है ?
टिक-टॉक कहता है, हम अपना डेटा चीनी सरकार के साथ साझा नहीं करते। मगर साल 2017 में चाइना ने एक "Special Intelligence law" बनाया जिसमें यह कहा गया कि अगर साम्यवादी चाईना सरकार को किसी 'सुरक्षा कारणों' के लिए अगर किसी चीनी कंपनी से डेटा चाहिए तो वह कंपनी यह नहीं कह सकती कि ये 'प्राइवेट डेटा' हैं, उन्हें वो डेटा देना पड़ेगा।
-Some other laws of Communist Party of China
चाइना 'टेक्नोलॉजी' के मामले में आज तक एक तरफा व्यापार करते आया है। जिन 59 चाइनिस एप्स को भारत ने बैन किया वह पूरी दुनिया में फैले हुए हैं "Made in China" के नाम से। मगर चाइना में आप देखें तो यहां Google, Facebook, YouTube और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों को घुसने तक नहीं दिया गया, बल्कि इनके टेक्नोलॉजी को चोरी किया गया और इनकी ही तरह बहरूपिये बनाएं। चाइना का YouTube हैं Youku, Google हैं baidu, Facebook हैं vaibo और Amazon हैं 'अलीबाबा'।
चाइनीस पॉलिसी कहती है, 'अगर किसी विदेशी कंपनी को चाइना में व्यापार करना है, तो उसे अपना IP (Intellectual Property) देना पड़ेगा और अगर कोई विदेशी कंपनी चाइना में अपनी टेक्नोलॉजी निर्यात करके संचालित करना चाहता है, तो उसे चाइनीस कंपनी के साथ "Joint Venture" बनाना पड़ेगा।
-At Last my opinion
अपनी राय देने से पहले मैं आपको लोकप्रिय गेम 'पब्जी मोबाइल' के बारे में बताना चाहूंगा। 'पब्जी मोबाइल' एक 'साउथ कोरियन' कंपनी "Blue Hole" की है, जिसे पूरी दुनिया में युवाओं ने खूब पसंद किया, मगर केवल चाइना में इस गेम को संचालित करने के लिए, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया साउथ कोरियन कंपनी "Blue Hole" को चाइनीस 'Tech Company "Tencent" के साथ 'Joint venture' बनाना पड़ा तब जाकर चाइना में पब्जी मोबाइल को संचालित किया गया।
मेरी राय में हु-बहू केवल भारत को ही नहीं बल्कि सभी देशों को ऐसा ही करना चाहिए, चाइना अगर किसी भी देश में व्यापार करना चाहता है तो उसे उस देश के 'प्रिंसिपल' को फॉलो करना होगा। और अगर चीन किसी देश मैं अपनी टेक्नोलॉजी को संचालित करना चाहता है तो उसे उस देश के किसी 'Major tech Company' के साथ 'Joint Venture' बनाना होगा, अपनी निष्ठा अपने उपभोक्ताओं के प्रति साबित करनी होगी ना कि चीनी साम्यवाद पार्टी के प्रति। और भारत को डेटा की सुरक्षा को लेकर थोड़ा सोचना चाहिए या कोई नियम बनाना चाहिए। अब रही बात चीनी एप्स के हमेशा के लिए बैन रहने या ना रहने की तो, हम इसके बारे मैं ना ही सोचे तो बेहतर है, हमें इसके विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए अन्यथा 'विकल्पों' को 'Make in India' बनाना चाहिए।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
कहानी खूनी वार से आर्थिक वार तक
गलती तो चीन ने तब ही कर दी थी, जब उसने LAC के इस पार कदम रखा था, मगर हद पार तब कर दी जब 15-जून को चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के साथ झड़प कर दी। जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए और चाइना के 53 सैनिक भी मारे गए। हालांकि सरकार ने चीन को लेकर सामने से कोई बड़ा बयान जारी नहीं किया, मगर आर्थिक मोर्चे की लड़ाई में सरकार ने कड़े संकेत दिए हैं, आइए बात करते हैं।
-Government Decision Against China
सबसे पहले सरकार ने स्टील आयात पर चीन सहित अन्य दो देशों पर भी 'Anti dumping duty' लगा दी, जिससे चीन द्वारा स्टील की बड़ी तादाद में डंपिंग पर टैरिफ लगेगा और आयात कम होगा। उसके बाद भारत में 80% से 90% सोलर उपकरणों का इस्तेमाल हम चाइना से किया करते हैं, मगर अब आयात को कम किया जा सके, इसके लिए भारत सरकार सोलर इनवर्टर, सोलर माड्यूल्स इन सबके आयात में 20% Basic custom duty (BCD) लगाएगी जो कि पहले 15% था। इसके बाद 22 जून से चीन से आ रहे सभी सामानों को बंदरगाहों पर रोक दिया गया, AIMED ( Association of Indian Medical device industry) ने अपनी रिपोर्ट मे बताया चीन से आने वाले माल की बंदरगाहों पर ही 100% जांच-पड़ताल की जा रही है, जिसके बाद उन सामानों को आगे बढ़ाया जाएगा। टेलीकॉम मंत्रालय ने BSNL को निर्देश दिए हैं, कि वह अपने काम में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल कम कर दे, जैसे कि 4G सुविधा के उन्नयन में किसी भी चीनी उपकरणों का इस्तेमाल ना किया जाए, पूरे टेंडर्स को नए सिरे से जारी किया जाए और सभी प्राइवेट सर्विस ऑपरेटर को निर्देश दिया गया, की चाइनीस उपकरणों पर अपनी निर्भरता कम से कम करदे।इसके बाद भारतीय रेलवे ने भी चीन के साथ किए हुए करार खतम कर दिये, साल 2016 में 471 करोड़ का करार, जिसमें कानपुर और दीन दयाल उपाध्याय सेक्सन के बीच 417 km के रूट पर Signaling and Telecommunications का काम होना था, जिसका ठेका चीनी कंपनी को दिया गया था, जो आज के माहौल में खतम कर दिया गया, हालांकि रेलवे ने सफाई यह दि, कि चीनी कंपनियों के खराब प्रदर्शन के कारण हमें यह ठेका खत्म करना पड़ा। हरियाणा सरकार ने भी चीनियों के साथ हुए बड़े करार खतम कर दिये, 'हिसार' और 'यमुना' नदी के पास थर्मल पावर प्लांट से जुड़े 842 करोड़ के टेंडर थे, जो की आज खतम कर दिए गए। इसके अलावा आपको बता दें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री 'आर.के सिंह' ने चीन को बड़ा झटका दिया है, बिना पूर्व अनुमति के अब चीन और पाकिस्तान से कोई भी बिजली उपकरण का सामान आयात नहीं किया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्री 'नितिन गडकरी' ने भी कहा सड़क और फ्लाई ओवर के कामों में अब कोई भी ठेका चीनी कंपनियों को नहीं दिया जाएगा।
-Good and Bad Consequences along with my Opinion
अब आर्थिक मोर्चे की लड़ाई तो छिड़ चुकी है,मगर आइए जानते हैं इसके अच्छे और बुरे प्रभावों के बारे में।
मेरी राय में सरकार द्वारा स्टील के आयात पर 'Anti dumping duty' लगाकर और सोलर उपकरणों में 20% BCD लगाकर एक सराहनीय कदम उठाया है, क्योंकि इससे भारत के छोटे-बड़े उद्योगों को एक सुनहरा अवसर मिलेगा और विदेशी कंपनियों के साथ घरेलू बाजार में अनुचित प्रतियोगिता पर रोक लगेगी, भारत में कई लोगों को रोजगार की प्राप्ति भी होगी और इसी के कारण 'Make in India' को प्रोत्साहन भी मिलेगा। अगर इसके बुरे प्रभाव की बात करें तो स्टील और सोलर भारत में सस्ते दामों पर आयात किए जाते थे, क्योंकि उन देशों में यह सस्ते हैं। मगर अब भारत में यह महंगे बिकेंगे और साथ में विकल्पों की भी कमी होगी। बंदरगाहों पर चीन द्वारा आयात सामानों की जांच पड़ताल, बेहद जरूरी हैं क्योंकि ऐसे हालात में चीन पर भरोसा करना मुश्किल है। भारतीय रेल द्वारा कानपुर और दीनदयाल उपाध्याय सेक्शन के बीच Signaling and Telecommunications के करार को चीन से खत्म करना, मेरी राय में सही विचार है, क्योंकि इससे स्वदेशी Signaling and Telecommunications companies जैसे Gocl corporation limited, TVM Signalling, balaji Railroad systems limited, ANI अन्य कंपनियों को काम मिलेगा। मगर इसके बुरे प्रभाव की बात करे तो चीनी कंपनियों के मुताबिक, स्वदेशी कंपनियां यह काम अधिक पैसों में करेगी क्योंकि चीन में 'Signaling and Telecommunications' का काम सस्ते में होता है। हरियाणा सरकार ने भी चीन के साथ थर्मल पावर प्लांट के करार को खत्म करके स्वदेशी कंपनियों के लिए एक सुनहरा मौका दिया है। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के इस कदम से भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि बिजली उपकरणों का सामान चीन से लगभग 60% से 70% हम आयात किया करते थे, क्योंकि चीन बिजली के उपकरणों का उत्पादन करने के लिए सबसे अच्छा देश माना जाता है, और अब आयात पर प्रतिबंध लगाकर हमें विकल्पों की कमी का भी सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है, कि चीन के साथ हमारे संबंध आगे बेहतर होंगे या चीन को भारत के साथ आर्थिक मोर्चे की लड़ाई में मुंह की खानी पड़ेगी।
राहुल सिंह द्वारा
-Government Decision Against China
सबसे पहले सरकार ने स्टील आयात पर चीन सहित अन्य दो देशों पर भी 'Anti dumping duty' लगा दी, जिससे चीन द्वारा स्टील की बड़ी तादाद में डंपिंग पर टैरिफ लगेगा और आयात कम होगा। उसके बाद भारत में 80% से 90% सोलर उपकरणों का इस्तेमाल हम चाइना से किया करते हैं, मगर अब आयात को कम किया जा सके, इसके लिए भारत सरकार सोलर इनवर्टर, सोलर माड्यूल्स इन सबके आयात में 20% Basic custom duty (BCD) लगाएगी जो कि पहले 15% था। इसके बाद 22 जून से चीन से आ रहे सभी सामानों को बंदरगाहों पर रोक दिया गया, AIMED ( Association of Indian Medical device industry) ने अपनी रिपोर्ट मे बताया चीन से आने वाले माल की बंदरगाहों पर ही 100% जांच-पड़ताल की जा रही है, जिसके बाद उन सामानों को आगे बढ़ाया जाएगा। टेलीकॉम मंत्रालय ने BSNL को निर्देश दिए हैं, कि वह अपने काम में चीनी उपकरणों का इस्तेमाल कम कर दे, जैसे कि 4G सुविधा के उन्नयन में किसी भी चीनी उपकरणों का इस्तेमाल ना किया जाए, पूरे टेंडर्स को नए सिरे से जारी किया जाए और सभी प्राइवेट सर्विस ऑपरेटर को निर्देश दिया गया, की चाइनीस उपकरणों पर अपनी निर्भरता कम से कम करदे।इसके बाद भारतीय रेलवे ने भी चीन के साथ किए हुए करार खतम कर दिये, साल 2016 में 471 करोड़ का करार, जिसमें कानपुर और दीन दयाल उपाध्याय सेक्सन के बीच 417 km के रूट पर Signaling and Telecommunications का काम होना था, जिसका ठेका चीनी कंपनी को दिया गया था, जो आज के माहौल में खतम कर दिया गया, हालांकि रेलवे ने सफाई यह दि, कि चीनी कंपनियों के खराब प्रदर्शन के कारण हमें यह ठेका खत्म करना पड़ा। हरियाणा सरकार ने भी चीनियों के साथ हुए बड़े करार खतम कर दिये, 'हिसार' और 'यमुना' नदी के पास थर्मल पावर प्लांट से जुड़े 842 करोड़ के टेंडर थे, जो की आज खतम कर दिए गए। इसके अलावा आपको बता दें केंद्रीय ऊर्जा मंत्री 'आर.के सिंह' ने चीन को बड़ा झटका दिया है, बिना पूर्व अनुमति के अब चीन और पाकिस्तान से कोई भी बिजली उपकरण का सामान आयात नहीं किया जाएगा। सड़क परिवहन मंत्री 'नितिन गडकरी' ने भी कहा सड़क और फ्लाई ओवर के कामों में अब कोई भी ठेका चीनी कंपनियों को नहीं दिया जाएगा।
-Good and Bad Consequences along with my Opinion
अब आर्थिक मोर्चे की लड़ाई तो छिड़ चुकी है,मगर आइए जानते हैं इसके अच्छे और बुरे प्रभावों के बारे में।
मेरी राय में सरकार द्वारा स्टील के आयात पर 'Anti dumping duty' लगाकर और सोलर उपकरणों में 20% BCD लगाकर एक सराहनीय कदम उठाया है, क्योंकि इससे भारत के छोटे-बड़े उद्योगों को एक सुनहरा अवसर मिलेगा और विदेशी कंपनियों के साथ घरेलू बाजार में अनुचित प्रतियोगिता पर रोक लगेगी, भारत में कई लोगों को रोजगार की प्राप्ति भी होगी और इसी के कारण 'Make in India' को प्रोत्साहन भी मिलेगा। अगर इसके बुरे प्रभाव की बात करें तो स्टील और सोलर भारत में सस्ते दामों पर आयात किए जाते थे, क्योंकि उन देशों में यह सस्ते हैं। मगर अब भारत में यह महंगे बिकेंगे और साथ में विकल्पों की भी कमी होगी। बंदरगाहों पर चीन द्वारा आयात सामानों की जांच पड़ताल, बेहद जरूरी हैं क्योंकि ऐसे हालात में चीन पर भरोसा करना मुश्किल है। भारतीय रेल द्वारा कानपुर और दीनदयाल उपाध्याय सेक्शन के बीच Signaling and Telecommunications के करार को चीन से खत्म करना, मेरी राय में सही विचार है, क्योंकि इससे स्वदेशी Signaling and Telecommunications companies जैसे Gocl corporation limited, TVM Signalling, balaji Railroad systems limited, ANI अन्य कंपनियों को काम मिलेगा। मगर इसके बुरे प्रभाव की बात करे तो चीनी कंपनियों के मुताबिक, स्वदेशी कंपनियां यह काम अधिक पैसों में करेगी क्योंकि चीन में 'Signaling and Telecommunications' का काम सस्ते में होता है। हरियाणा सरकार ने भी चीन के साथ थर्मल पावर प्लांट के करार को खत्म करके स्वदेशी कंपनियों के लिए एक सुनहरा मौका दिया है। ऊर्जा मंत्री आरके सिंह के इस कदम से भारत को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि बिजली उपकरणों का सामान चीन से लगभग 60% से 70% हम आयात किया करते थे, क्योंकि चीन बिजली के उपकरणों का उत्पादन करने के लिए सबसे अच्छा देश माना जाता है, और अब आयात पर प्रतिबंध लगाकर हमें विकल्पों की कमी का भी सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है, कि चीन के साथ हमारे संबंध आगे बेहतर होंगे या चीन को भारत के साथ आर्थिक मोर्चे की लड़ाई में मुंह की खानी पड़ेगी।
राहुल सिंह द्वारा
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