Thursday, 7 May 2020

#आओ चटपटी 'खबर' पकाएं

प अगर सोच रहे हैं 'खबर' कोई स्वादिष्ट सा पकवान है, तो माफ करिएगा आप बिल्कुल गलत सोच रहे हैं। दरअसल मैं यहां किसी 'खाने' या फिर किसी 'पकवान' के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ, मैं यहां 'खबर' अर्थात 'समाचार' जो हम टीवी में सुनते हैं, देखते हैं, उसकी बात कर रहा हूं।
तो आइए शुरू करते हैं, 'खबर' पकाने का सिलसिला,-
'चटपटी खबर' पकाने के लिए सामग्री में चाहिए- संप्रदायवाद तेल, बाइट मसाला, राजनीतिक मसाला, ट्विटर मसाला, आवाज गरम मसाला और खुद से बना हुआ कोई भी मसाला।

तो 'चटपटी खबर' पकाने के लिए सबसे पहले आपको बाहर जाना पड़ेगा, यानी की बाजार में, जहां आपको तरह-तरह की खबरें मिलेंगी जैसे- आर्थिक मंदी, गरीबी, लाचार मजदूर, बेरोजगारी, राजनीति, चुनाव, सामाजिक अपराध, चोरी डकैती, रेप, महामारी, आपदा, आतंकवादी हमला, कालाबाजारी, मॉब लिंचिंग आदि। अब आपको ऐसी खबरें उठाकर लानी है जिसको लोग अधिक से अधिक देखना पसंद करें, यानी कि जिससे TRP बड़े। अब अधिकतर मीडिया को सबसे ज्यादा राजनीतिक, चुनाव, आतंकवादी हमले, सामाजिक अपराध, चोरी-डकैती, रेप, मॉब लिंचिंग जैसी खबरें ही पसंद आती है।
अब शुरू होता है खबरों को पकाने का काम। मान लीजिए आप कोई भी 'खबर' को पकाना चाहते हैं, तो उसके लिए सबसे पहले आपको संप्रदायवाद तेल में 'खबर' को अच्छे से तलना पड़ेगा, अच्छे से तलने के बाद उसमें राजनीतिक मसाला डालिए, ध्यान रहे राजनीतिक मसाला अगर आप 'कांग्रेस' कंपनी का डालेंगे तो खबर ओर भी ज्यादा चटपटी बनेगी। इसके बाद ट्विटर मसाले का डब्बा खोलिए, उसमें आपको तरह-तरह के बयान मसाले मिलेंगे, आपको जो सबसे ज्यादा विवादित बयान लगे उसे आप उठा कर डाल दीजिए, फिर आप अगर खबर का चटपटा पन ओर बढ़ाना चाहते हैं तो उसमें किसी बड़े नेता का 'बाइट मसाला' डाल दीजिए। और अंत में आप अपने खबर को 'आवाज गरम' मसाले के साथ चैनल प्लेट मैं परोसीए और स्वाद में फिर भी कोई कमी रेह जाए, तो अपने से कोई भी मसाला बनाकर डाल दीजिए, हालाकि यह मसाला नहीं डालना चाहिए।

तो चटपटी खबर बनाना तो आप सीखे गए होंगे मगर आपसे एक सवाल, खबर को आप कच्चा देखना पसंद करते हैं या फिर उसे पका हुआ देखना पसंद करते हैं, उम्मीद करता हूं आप खबरों को कच्चा ही देखना पसंद करते होंगे, यानी कि जो खबर जैसी है वैसी ही दिखाइ जाए, हां मैं ये नहीं कह रहा कि खबरों में मसाला बिल्कुल मत लगाइए, लगाइए मगर थोड़ा कम। और बाजार से खबरें वह लाइए जो लोकतंत्र के पेट के लिए जरूरी हो, ना कि आपके(मीडिया) पेट के लिए।
अंत में यही कहना चाहूंगा, खबरों को पकाइए मत उसे जैसा है वैसा ही लोकतंत्र के सामने परोसीए।
नोट:- BJP वालों के लिए 'खबरें' थोड़ा कम बनाया करें,
'आवाज गरम मसाले' का प्रयोग तो बिल्कुल ना कर।

धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा

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