बुध पुर्णिमा से एक दिन पहले की वो रात थी, मेरे घड़ी में रात के 9 बज रहे थे, और टीवी में चौधरी जी का DNA चल रहा था, हमेशा की तरह वह खबरों को संप्रदायवाद के तेल में तलने का काम कर रहे थे और मैं रोटी में बैगन का भरता भरकर दही में डुबोकर साथ में आम का अचार भी खा रहा था। वो एक एक निवाला मेरे जीब को स्वाद दे रहा था, मगर चौधरी जी का DNA आज कुछ खास ना लग रहा था। मैंने खाना खत्म किया और आधे पे ही टीवी बंद कर दिया। माँ ने आखिर में दूध भी थमा दिया, मैंने बड़े ही मुश्किल से दूध को भी अपने पेट में थोड़ी जगह दे दी और चल पड़ा अपने बिस्तर की ओर। मेरी अक्सर रात में लाइट जलाकर सोने की आदत है, उस रात मच्छर बहुत थे, मैंने कीड़े और मच्छर मारने वाला स्प्रे अपने रूम में स्प्रे किया और कुछ देर बाद सोने की कोशिश की, क्योंकि बैगन का भरता और रोटी मेरे पेट में आपस में लड़ाई कर रहे थे, दूध और दही आपस में मिलकर रह रहे थे और आम का अचार इन सब का लुफ्त उठा रहा था। बड़ी मुश्किल से मुझे नींद आई मगर फिर रात के ठीक 3 बजे मेरी आंख खुली, मैं फिर सोने के लिए करवट बदलने लगा की तभी मेरी नजर जमीन पर पड़ी, मैंने देखा कई सारे मच्छर उस स्प्रे के कारण जमीन पर तड़प रहे थे, ऐसे लग रहा था जैसे वह सांस के लिए तड़प रहे हो, कुछ थोड़ा बहुत उड़कर गिर जा रहे थे, हर मच्छरों के चारों तरफ चीटियां लगी हुई थी, और जो मर गए थे उन्हें चीटियां उठाकर ले जा रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे मानो वो मच्छर मुझसे मदद मांग रहे हो, मगर मैं उनको बचा ना सका। एक मिनट आप कही इमोशनल तो नहीं हो गए, अरे मच्छर थे वो, इंसान नहीं। मैं फिर से सो गया और सुबह उठते ही पहले मैंने अपने पेट से उन शरारती तत्वों को बाहर निकाला। घड़ी में सुबह के ठीक 9 बज रहे थे और टीवी में चौधरी जी तो नहीं आ रहे थे, मगर कुछ खबरे आ रही थी, ठीक वैसी ही जो कल रात मैंने 3 बजे देखा। आंध्र प्रदेश के वेंकट पुरम के पास ठीक 3 बजे सटाईरिन (styarin) गैस लीक हुई, कई सारे लोग उस गैस के कारण जमीन पर तड़प रहे थे, ऐसे लग रहा था जैसे वह सांस के लिए तड़प रहे हो, कुछ थोड़ा बहुत चल कर गिर जा रहे थे, हर लोगों के चारों तरफ स्वास्थ्य कर्मी लगे हुए थे, और जो मर गए थे उन्हें स्वास्थ्य कर्मी उठाकर एंबुलेंस में ले जा रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे मानो वो लोग मुझसे मदद मांग रहे हो, मगर मैं उनको बचा ना सका। एक मिनट कहीं आप फिर से इमोशनल तो नहीं हो गए, अरे इंसान थे वो, मच्छर नहीं, इमोशनल होइए। उस रात मैंने उन मच्छरों में इंसान को तड़पते हुए देखा।
आंध्र प्रदेश में गैस रिसाव के कारण मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि और नमन।
धन्यवाद, राहुल सिंह द्वारा
That one is epic and different way to describe 🤩
ReplyDeleteGood✍️
ReplyDelete👌👌skillfull
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