बस फिर क्या था 5 बजे की वो शाम थी सूरज ढलने की राह पर था, वो और मैं खाने की टेबल पर बैठे एक दूसरे को बस टक-टकी लगाए देखी जा रहे थे, ना वो कुछ बोल रही थी और ना मैं। उसके प्लेट में पाँच पानी-पूरीया थी और मेरी थाली खाली थी बगल में एक चम्मच और प्याली रखी हुई थी। तभी मुझे वो बात याद आई जो मैं उससे फोन पर कहना चाहता था मैंने बोला अच्छा सुनो, इतने पर ही उसने बोला चुप रहो, मुझे अब पानी-पुरी खाने दो। उसने खाना शुरू किया कि तभी पुलिस आ गई, मैंने पुलिस को देखा और हाथों में चम्मच उठा लिया, पुलिस ने मुझे देखा और हाथों में डंडा उठा लिया, फिर मैंने पुलिस को देखा और दूसरे हाथ में अपनी थाली उठाली और चम्मच से थाली को पीटने लगा पर फिर पुलिस ने मुझे देखा और डंडा उठाया और वो मेरी गर्लफ्रेंड को पीटने लगा।
बस फिर क्या था, वह 5 बजे की शाम मेरी जिंदगी के लिए ब्रेकअप की शाम साबित हो गई। और आज मैं लॉक डाउन में बैठा उसके लिए अफसोस करता हूं कि काश उसने मेरी बात सुन ली होती जो मैं फोन पर कहना चाहता था, कि वह तारीख थी रविवार 22 मार्च की और दिन था जनता कर्फ्यू का।
शुक्रिया शुक्रिया
सीख:- लड़कियों को ज़िद थोड़ी कम करनी चाहिए
राहुल सिंह द्वारा....
बस फिर क्या था, वह 5 बजे की शाम मेरी जिंदगी के लिए ब्रेकअप की शाम साबित हो गई। और आज मैं लॉक डाउन में बैठा उसके लिए अफसोस करता हूं कि काश उसने मेरी बात सुन ली होती जो मैं फोन पर कहना चाहता था, कि वह तारीख थी रविवार 22 मार्च की और दिन था जनता कर्फ्यू का।
शुक्रिया शुक्रिया
सीख:- लड़कियों को ज़िद थोड़ी कम करनी चाहिए
राहुल सिंह द्वारा....
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