Sunday, 17 May 2020

शादी In Lockdown PART- 1 "ब्लडी फूल"

से पढ़ने वाले को नमस्कार, हमारा नाम 'फूल कुमार' उर्फ 'चौबे' है। आपसे अनुरोध है, कि ये जो आप आधा पढ़कर आधा छोड़ देते हैं ना, यह बिल्कुल ना करें वरना जो हमें लिख रहा है, वह आपसे नाराज हो जाएंगे।

1 जनवरी 2020, नया साल था और हमने तय कर लिया था, की भईया विवाह तो हम इसी साल करेंगे। बस फिर क्या था पंडित जी को बुलाया गया और मूहूरत तय किया गया, दिन रविवार, तारीख पहली और महिना जून का। हमने उल्टी गिनती गिनना शुरु कर दिया। मगर शनि महाराज जी ने कुंडली तो हमारी पहले ही सेट कर रखी थी, यहां कोरोना ने भारत में दस्तक दिया वहां मोदी जी ने लॉकडाउन का ऐलान किया। हमने अम्मा जी से कहीं 'जब तक लॉकडाउन नहीं खुलेगा तब तक हम विवाह नहीं करेंगे', तभी पिता जी ने भी कही 'फिर तो बेेेेटा हो-ली इस साल तुम्हारी शादी', 'देेेेखो विवाह तो तुम्हारा मुहूर्त पर ही होगा, चाहे जो हो जाए' और लड़कियां खोजना शुरू हो गए, बड़ी मशक्कत के बाद एक लड़की के परिवार वालों से मिलने का तय हुआ। चौबे खानदान की लड़की थी, नाम था "रेहाना" अत्यंत शर्मीली और संस्कारी। हम मन ही मन मुस्काए और शुरू कर दिये हनुमान चालीसा के जगह 'रेहाना' नाम जपना।
अब मिलने का तय तो हो गया था, मगर ना होटल खुला था, ना ढाबा, क्योंकि शहर लॉक डाउन था। फिर तय हुआ कि हम मंगलवार को परिवार सहित पास वाली सब्जी मंडी में मिलेंगे।
 दिन मंगलवार, मैं, मेरे पिताजी, अम्मा और साथ में छोटा भाई, हाथों में झोला, मुंह पर मास्क और पैरों में हवाई चप्पल पहन कर निकल पड़े। हमने उस दिन नंदू भाई के ठेलें वाली खास जींस डाली थी। वो भी अपने मां-बाप और छोटी बहन के साथ आ रही थी।
सब्जी मंडी में पहुंचते ही उसके पिता ने फोन किया 'हम पास की सब्जी मंडी में पहुंच चुके हैं', मेरे पिताजी ने कहा 'हम भी'। अब एक दूसरे को, तो ना हमने देखा था ना उन्होंने और शुरू हुआ 'खोजने का काम'।
मैं हर लड़की को पैनी नजरों से घूर-घूर कर देखू और लड़कियां मुझे देख के मुंह घुमा ले, बड़ा मुश्किल था। मगर इसी क्रम में देखते-देखते एक लड़की से मैं टकरा जो गया, बस फिर क्या था, उसका हाथ और मेरा गाल, "दीया घुमा के"। उस लड़की के पापा मम्मी सब आ गए, मगर मेरे पिता जी, वही खैनी की दुकान पे खैनी मल रहे थे, अम्मा हमेशा की तरह तोरी वाले से लड़ रही थी और छोटा भाई लउनडियाबा....,, खैर छोड़िए। उस लड़की का बाप बोला 'क्या हुआ रेहाना बेटा, क्या हुआ' और लड़की ने जवाब दिया 'पता नहीं ये लफंगा, देहाती, गवार लड़का मेरे से आकर टकरा गया' और अंत में उसने अंग्रेजी के जो दो शब्द कहे "ब्लडी फूल", वह मेरे दिल को ऐसे चुभे मानो 'दिल के अरमा.....,, खैर छोड़िए आपको तो पता ही है। मैंने अपने पिता जी से कहा, 'लड़की देख ली हैं तुरंत घर चलिए' पिताजी ने कहा 'कब, हमें भी तो दिखाओ' हमने कहीं 'विवाह आपको करना है या हमें', और हम सब घर आ गए।
मैंने पिताजी को कोने में लेते हुए पूछा,'आपने तो कही थी लड़की शर्मीली और संस्कारी हैं' पिताजी ने जवाब दिया 'बिल्कुल इसमें कोई शक नहीं, चौबे खानदान की शान है' फिर फुस-फुसाते हुए उन्होंने मुझसे पूछा,'तुम्हें कैसी लगी रेहाना' मैंने लंबी सांस ली और दृश्य याद करते हुए कहा "ब्लडी फूल"

अब देखना यह है, की 'फूल कुमार' क्या 'रेहाना' से शादी करेगा या फिर उसे मना कर देगा।

बहुत-बहुत शुक्रिया, अगला पाट बहुत जल्द।
राहुल सिंह द्वारा

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